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अनूपपुर (मध्यप्रदेश):-सरस मेलों के माध्यम से आदिवासी कलाकृतियों को मिल रही पहचान

अहमदाबाद सरस मेला में जिले के समूह को मिला तृतीय पुरस्कार*

रिपोर्ट तीरथ पनिका
Ibn24x7 News
मध्यप्रदेश

अनूपपुर 8 फ़रवरी – भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा ग्रामीण स्तर पर स्थानीय कलाकारों द्वारा बनाई जा रही विभिन्न कलाकृतियों को पहचान और कलाकारों को एक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से देश के विभिन्न प्रान्तों में सरस मेलों का आयोजन किया जा रहा है। उक्त सरस मेलों में अनूपपुर जिले के आदिवासी कलाकार भी प्रतिभाग कर रहे हैं और ख्याति अर्जित कर रहे हैं।

कलेक्टर श्री चंद्रमोहन ठाकुर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी , जिला पंचायत डॉ सलोनी सिडाना के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत गठित स्व सहायता समूह के सदस्यों द्वारा भी इन मेलों में प्रतिभाग कर अपनी कला का प्रदर्शन किया जा रहा है। जिले के पुष्पराजगढ़ विकासखंड के ग्राम लंघवाटोला ग्राम पंचायत पुरगा के गोंडी चित्रकला स्व सहायता समूह की सदस्य श्रीमती अंजना श्याम एवं श्रीमती रीता श्याम द्वारा समूह प्रतिनिधि के रूप में अपने कलाकार सहयोगियों श्री महेश श्याम एवं रमेश श्याम के साथ भागीदारी कर गोंडी चित्रकला का प्रदर्शन किया जा रहा है। अहमदाबाद गुजरात मे आयोजित सरस मेला में जिले के गोंडी चित्रकला स्व सहायता समूह के स्टाल को बेस्ट डेकोरेटिव स्टाल श्रेणी में तृतीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है, जिले के आदिवासी के कलाकारों द्वारा अभी तक सरस मेला अहमदाबाद-गुजरात, सूरजकुंड- हरियाणा, भोपाल एवं हैदराबाद, तेलंगाना में अपनी कलाकृतियों के स्टाल लगाकर कला का प्रदर्शन किया गया तथा कलाकृतियों की बिक्री की गई।
कलाकारों द्वारा बताया गया कि इन मेलों में भागीदारी हेतु आजीविका मिशन के जिला कार्यालय द्वारा समन्वय किया जाता है तथा मिशन के प्रयासों से ही जिले की गोंडी आदिवासी कलाकृतियों को देश भर में एक नई पहचान मिल रही है। आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक शशांक प्रताप सिंह ने बताया कि संस्कार, सभ्यता एवं संस्कृति का संरक्षण समूह का एक महत्वपूर्ण सूत्र है, इसी को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए न सिर्फ गोंडी चित्रकला से जुड़े सदस्यों को इस तरह के राष्ट्रीय मंचों में प्रतिभाग का अवसर प्रदान किया जा रहा है, बल्कि काष्ठ शिल्प, बांस शिल्प लौह शिल्प से जुड़े कलाकारों को भी चिन्हित कर उन्हे प्रशिक्षित कर राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है।

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