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कल है, जितिया व्रत, जानें क्या है पूजा और पारण का समय

✍🏻आर्यन सिंह राजपूत की संकलन

अपने पुत्र की मंगल कामना करते हुए महिलाएं जितिया व्रत का उपवास रखती हैं। इस व्रत को मुख्य रुप से महिलाएं बिहार और उत्तरप्रदेश में रखती हैं। जीवित्पुत्रिका या जिउतिया व्रत आज नहाय-काय के साथ शुरु हो गया है । इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास करके अपने पुत्र की लंबी आयु और अच्छी सेहत के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हैं।

कल है जितिया व्रत

जितिया व्रत की तारीख को लेकर पंडित कोआ माने तो उन्होंने बताया कि जितिया व्रत प्रत्येक वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को होती है। प्रदोष काल व्यापिनी अष्टमी को जीमूतवाहन का पूजन होता है।

जितिया व्रत के लिए यह भी आवश्यक है कि पूर्वाह्न काल में पारण हेतु नवमी तिथि प्राप्त होनी चाहिए। इस वर्ष अष्टमी तिथि दिनांक 22 सितंबर रविवार को दिन में 2:10 तक ही है। ऐसे में 21 तारीख दिन शनिवार को सप्तमी है, सप्तमी को प्रदोष व्यापिनी अष्टमी में व्रत रखते हैं तो पारण करने के लिए 22 सितंबर को पूर्वाह्न में नवमी तिथि प्राप्त नहीं हो रही है।

ऐसी स्थिति में महिलाओं को उदया अष्टमी दिन रविवार को उपवास रखना चाहिए, फिर प्रदोष काल में ही जीमूतवाहन की पूजा करें। अगले दिन सोमवार को नवमी में सुबह के समय पारण करें।

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पूजा और पारण का समय

इस प्रकार से जितिया व्रत का उपवास 22 सितंबर को तथा प्रदोष काल में (शाम 4:28 से रात्रि 7:32 तक) जीमूतवाहन का पूजन होगा। फिर दिनांक 23 सितंबर सोमवार को सुबह व्रत का पारण होगा।

जितिया व्रत की कथा सुनें

जितिया व्रत सौभाग्यवती महिलाएं अपने बेटे के दीर्घ, आरोग्य और सुखमय जीवन के लिए करती हैं। यह व्रत बेहद ही कठिन होता है। इसमें अन्न और जल का त्याग करना होता है, महिलाओं को निर्जला व्रत रखना होता है। गन्धर्व राजा जीमूतवाहन की पूजा करने के साथ ही जितिया व्रत की कथा भी सुनना आवश्यक होता है।

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