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झाँसी रेलवे ने 130 वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया, पहली बार हुआ समारोह, केक काट कर खुशियां बिखेरीं, स्टेशन परिसर में 100 फीट का राष्ट्रीय ध्वज स्थापित होगा

झाँसी 2 जनवरी। उत्तर मध्य रेलवे के झाँसी स्टेशन के लिए मंगलवार का दिन अनूठा व यादगार बन कर मीठी खुशियां बिखेर गया। और साक्षी बने मण्डल रेल प्रबन्धक सहित सभी विभागाध्यक्ष, सुपरवाइजर्स आदि अधिकारियों के साथ मीडिया कर्मी। मौका था झांसी रेलवे स्टेशन के स्थापना दिवस का। 130 वर्ष की यादें संजोए झांसी स्टेशन ने पहली बार अपना स्थापना दिवस मनाया। और मण्डल रेल प्रबन्धक अशोक कुमार मिश्र की पहल ने इसे यादगार बना दिया। तालियों की गडग़ड़ाहट के बीच स्टेशन डायरेक्टर कक्ष में स्थापना दिवस समारोह में अशोक कुमार मिश्र मंडल रेल प्रबंधक व संजय सिंह नेगी अपर मंडल रेल प्रबंधक एवं स्टेशन डायरेक्टर अनुपम सक्सेना ने स्टीम इंजन रूपी केक काटा। उपस्थित अधिकारियों, मीडिया कर्मियों व कर्मचारियों ने यादगार लम्हों के बीच स्थापना दिवस के साथ नव वर्ष की एक दूसरे को शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक अशोक कुमार मिश्र ने रेल के इतिहास के पन्नों को पलटते हुए बताया कि भारत की पहली रेलगाड़ी 16 अप्रैल 1853 को बोरीबंदर से थाणे के मध्य ग्रेट इंडियन पेनिनसुलर रेलवे द्वारा चलाई गयी थी।

19 वीं सदी के सातवें दशक में रेल लाइन मुंबई से इटारसी तक आ गयी थी, तत्पश्चात भोपाल की बेगम नवाब ने इसे भोपाल तक बढ़वाया। भोपाल से झांसी तक जीआईपी रेलवे ने लाइन डलवाई जिसकी शुरुआत 1889 में हुई। झांसी रेलवे स्टेशन भवन हेतु मिलिट्री सिविल प्रशासन आईएमआर के प्रतिनिधियों द्वारा सुझाए गए 4 स्थानों में से एक को चुन लिया गया परन्तु सेन्य दृष्टि से उस स्थान को असुरक्षित माना जा रहा था।

जुलाई 1886 में झांसी में इस स्थान का अंतिम रूप से चयन व अधिग्रहण करके अप तथा डाउन पैसेंजर प्लेट फार्म, एक प्रतीक्षालय सहित अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए आवास का निर्माण हुआ। इसके बाद झांसी स्टेशन का उदघाटन 1 जनवरी 1889 को संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि इंडियन मिडलैंड रेलवे, जिसका मुख्यालय झांसी था के द्वारा झांसी से कानपुर, ग्वालियर तक लाइन डलवाई गयी। 1878 से 1881 के मध्य में ग्वालियर-आगरा खंड का निर्माण सिंधिया स्टेट रेलवे द्वारा किया गया।

1884 में दिल्ली-मथुरा, 1885 में आगरा-मथुरा रेलखंड बने। 1889 में झांसी-मऊरानीपुर, मऊरानीपुर-बांदा, बांदा-मानिकपुर खंड का निर्माण कार्य इंडियन मिडलैंड रेलवे द्वारा किया गया। प्रारम्भ में झांसी स्टेशन से 2 गाडिय़ों का संचालन किया गया, तत्पश्चात इस रूट पर तत्कालीन समय की प्रसिद्ध गाड़ी पंजाब मेल का संचालन भी इसी रूट पर हुआ। इस रूट पर देश की पहली सबसे तेज रेलगाड़ी का संचालन इसी खंड पर हुआ व वर्तमान में भी देश की सबसे तेज रेलगाड़ी गतिमान एक्सप्रेस का संचालन भी झाँसी स्टेशन से ही हो रहा है।मण्डल रेल प्रबन्धक ने बताया की झांसी स्टेशन परिसर में शीघ्र ही 100 फीट का राष्ट्रीय ध्वज स्थापित किया जायेगा।

इसके लिए काम शुरू हो गया, प्रयास है कि गणतंत्र दिवस को स्टेशन पर तिरंगा फहरा कर यादगार बन जाए। उन्होंने स्टेशन पर यात्री सुविधाओं में लगातार किए जा रहे विस्तार की जानकारी देते हुए बताया कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिफ्ट तथा नये एफओबी की शुरुआत की जाएगी। महानगरों की तर्ज पर स्टेशन पर सर्कुलेटिंग क्षेत्र में निशुल्क ड्राप एंड गो जोन बनाया जायेगा। जिससे यात्रियों को जाम आदि समस्या से निजात मिलेगी। प्लेटफार्म नम्बर दो पर स्वचालित सीढिय़ों के संचालन की व्यवस्था की जाएगी, हाट के मैदान में अनाधिकृत रूप से पड़ी बालू व गिटटी आदि निर्माण सामग्री को हटवाया जाएगा।

इस अवसर पर डॉ. वायएस अटारिया सीएमएस मण्डल रेलवे अस्पताल, विपिन कुमार सिंह वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, सारिका मोहन वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त, शशि भूषण वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक, दुर्गेश दुबे वरिष्ठ मण्डल परिचालन प्रबन्धक जनरल, मुदित चंद्रा वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी सहित अन्य विभागों के अध्यक्ष, अधिकारी, सुपरवाइजर, निरीक्षक एवं कर्मचारीगण आदि मौजूद रहे।

 

रिपोर्ट महेंद्र सिंह सोलंकी ibn24x7news झाँसी

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