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बगहा:- एक सिक्के का महत्व “जब सबों को साथ- साथ लेकर चलना सिखाती है हमारी संस्कृति

बगहा:-बगहा नगर के नैतिक जागरण मंच के सचिव सह सुप्रसिद्ध समाजसेवी भारतीय परंपरा की अपनी अनोखी विशेषताएं हैं । यह हरपल हर व्यक्ति को उनकी योग्यता अनुसार आदर देने व सबको साथ लेकर चलना सिखाती है ।परंतु वर्तमान भौतिकवादी माहौल में जब हम अधिकाधिक धन उपार्जन कर लेते है।तब दूसरों को छोटा समझने की आदत डाल लेते हैं। धन की शायद यह ओछी प्रवृत्ति है ।यह हमारे मन को भी इस कदर बढ़ा देती है कि हमें अच्छा बुरे का ज्ञान नहीं रह जाता ।लक्ष्मी को चंचल कहा गया है और जब यह बावरे मन का साथ पाती है ।तो यह मन को और भी चंचल बना देती है। इसी धन के अहंकार के वशीभूत हम धर्म शास्त्रों का अर्थ भी अपने अनुसार बदल लेते हैं।यही कारण होता है कि जब हम शादी जैसे समारोह में हिस्सा लेने जाते हैं ।तब बड़े नोटों को अपने साथ रखते हैं ।पर छोटे नोटों का महत्व नहीं देते हैं ।उनको अपने पास रखना भी पसंद नहीं करते तथा अपनी श्रेष्ठता के अनुसार उसे कम आकर उसे हेय दृष्टि से देखते हैं । आमतौर पर सामाजिक संस्कारों समारोह मे जब हम पहुंचते हैं और पुरानी तथा बेहद शानदार परंपरा न्योता करने की बात आती हैं ।तब बड़े नोटों के साथ एक छोटा नोट यानी एक रूपये को लगाने की परंपरा हमको रोक देती है ।क्योंकि 100 या 200 या फिर 500 का नोट तो हमारे पास होता है लेकिन ₹1 का सिक्का नहीं होता। जिसके कारण हमें दूसरों से सहायता लेनी पड़ती है । उस समय हमें उस एक रुपए के सिक्के का महत्व समझ में आता है । संभवतः यह हम सभी के साथ कभी ना कभी घटित हो ही जाता है। जो कल के समारोह में मेरे साथ घटित हुआ। एक सज्जन ने मुझे ₹1 का सिक्का देते हुए , मेरी सहायता की ।यह घटना निश्चित तौर पर छोटी है।पर माकुल और बेहद शानदार सीख देती है ।यह उस कविओं की उन पंक्तियों को याद दिलाती है । जिन्हें हम भूलते जा रहे हैं। कविता की पंक्तियां हमें सामाजिक जीवन में अपने व्यवहार और आचरण पर नियंत्रण रखना सिखाती है। जो हमें छोटे और बड़ों के साथ समान व्यवहार करने की प्रेरणा देती है ।
“रहिमन देख बड़ेन को लघु न दीजिए डारि। जहां काम आवे सुई की कहां करे तलवारी।।
दूसरी ओर एक अन्य कवि ने लिखा है तिनका का कबहुं न निंदिये जो पायंतर होय। कभी उड़ी अखियन पडे पीर घनेरी होय।। अतः एक सिक्के का भी काफी और अत्यंत महत्व है। भले ही व्यवसायिक दृष्टिकोण में हम लोग उसका बहिष्कार करते जा रहे हैं। यह उचित नहीं है। कल के शादी समारोह में जिन दोस्तों के साथ खुशनुमा पल व्यतीत हुआ ।उसके कुछ चित्र प्रस्तुत है….

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