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बहराइच : गन्ने की अगेती प्रजातियों की बुवाई के लिए भूमि उपचार एवं बीज उपचार आवश्यक

 


IBN24×7news
रिपोर्ट-सत्यपाल मौर्य
कैसरगंज
गन्ने की अगेती प्रजातियों की बुवाई के लिए भूमि उपचार एवं बीज उपचार आवश्यक है। यह बातें तहसील कैसरगंज के होलपारा में पारले चीनी मिल द्वारा एक आयोजित कृषक गोष्ठी में पारले चीनी मिल के गन्ना प्रबंधक संजीव राठी द्वारा की गई। जिसमें दर्जनों किसान मौजूद रहे। गोष्ठी का संचालन गन्ना अधिशासी रूचिन लाटियान द्वारा किया गया,एवं गोष्ठी का संबोधन पारले चीनी मिल के सहायक मुख्य गन्ना प्रबंधक संजीव राठी द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि किसानों को अच्छा उत्पादन लेने के लिए स्वस्थ बीज का चयन करना चाहिए ।जिससे फसल में किसी प्रकार का रोग बीमारी ना हो।इस समय कहीं-कहीं पर गन्ना खेतों में रेडराॅट 0238 गन्ना प्रजाति में दिखाई दे रहा है। इसलिए इस रोग से बचने के लिए गन्ना किसानों को खेत की तैयारी के समय 2 किलोग्राम ट्राइकोडरमा प्रति बीघा की दर से और दो बैग पारले गोल्ड जैविक खाद के साथ मिलाकर प्रयोग करना चाहिए। साथ-साथ बीज के उपचार लिए 100 ग्राम हेक्जास्टाप फंजीसाईड दवा एवं 100 ग्राम इमिडाक्लोरोप्रिड दवा एक साथ मिलाकर 100 लीटर पानी में घोल बना लें और गन्ने के टुकड़े को 5:00 मिनट तक उपचारित करके बुवाई करें, इससे रोग एवं कीड़ों की रोकथाम होगी और अधिक से अधिक उत्पादन गन्ना किसानों को मिल सकेगा। और इसके अलावा केवल अगेती प्रजाति ही बुवाई करें जिससे अधिक से अधिक उत्पादन किसानों को मिल सकेगा।जैसे
0238, 0118,08272 आदि। केवल दो आंख का टुकड़ा ही बुआई में प्रयोग करें इसके अलावा कृषकों को शरद कालीन गन्ना बुवाई से अधिक से अधिक करने का सुझाव दिया गया।तथा इस समय के गन्ना बुवाई के फायदो के बारें में भी किसानो को बताया गया।इस समय गन्ना बुवाई में किसान भाई गन्ने के साथ सहफसल में लाही, मसूर एवं आलू आदि की फसलें गन्ने के साथ ले सकते हैं। लेबर भी आसानी से मिल जाते हैं। पैदावार 30% अधिक मिलतीं है और रोग एवं कीङो का प्रकोप भी कम होता है।इसके अलावा क्षेत्र के खपुरवा एवं रमटेड़िया गांव में गन्ना की बुवाई कर रहे किसानों के प्लाटों का निरीक्षण किया गया। खपुरवा में सुंदर लाल वर्मा व अंगरेज वर्मा के खेत पहुंचकर किसानों को ट्रेंच विधि से गन्ना बुवाई के बारे में बताया गया। इस मौके पर क्षेत्रीय सुपरवाइजर शैलेंद्र सिंह एवं अमर बहादुर उपस्थित रहे। की अगेती प्रजातियों की बुवाई के लिए भूमि उपचार एवं बीज उपचार आवश्यक है। यह बातें तहसील कैसरगंज के होलपारा में पारले चीनी मिल द्वारा एक आयोजित कृषक गोष्ठी में पारले चीनी मिल के गन्ना प्रबंधक संजीव राठी द्वारा की गई। जिसमें दर्जनों किसान मौजूद रहे। गोष्ठी का संचालन गन्ना अधिशासी रूचिन लाटियान द्वारा किया गया,एवं गोष्ठी का संबोधन पारले चीनी मिल के सहायक मुख्य गन्ना प्रबंधक संजीव राठी द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि किसानों को अच्छा उत्पादन लेने के लिए स्वस्थ बीज का चयन करना चाहिए ।जिससे फसल में किसी प्रकार का रोग बीमारी ना हो।इस समय कहीं-कहीं पर गन्ना खेतों में रेडराॅट 0238 गन्ना प्रजाति में दिखाई दे रहा है। इसलिए इस रोग से बचने के लिए गन्ना किसानों को खेत की तैयारी के समय 2 किलोग्राम ट्राइकोडरमा प्रति बीघा की दर से और दो बैग पारले गोल्ड जैविक खाद के साथ मिलाकर प्रयोग करना चाहिए। साथ-साथ बीज के उपचार लिए 100 ग्राम हेक्जास्टाप फंजीसाईड दवा एवं 100 ग्राम इमिडाक्लोरोप्रिड दवा एक साथ मिलाकर 100 लीटर पानी में घोल बना लें और गन्ने के टुकड़े को 5:00 मिनट तक उपचारित करके बुवाई करें, इससे रोग एवं कीड़ों की रोकथाम होगी और अधिक से अधिक उत्पादन गन्ना किसानों को मिल सकेगा। और इसके अलावा केवल अगेती प्रजाति ही बुवाई करें जिससे अधिक से अधिक उत्पादन किसानों को मिल सकेगा।जैसे
0238, 0118,08272 आदि। केवल दो आंख का टुकड़ा ही बुआई में प्रयोग करें इसके अलावा कृषकों को शरद कालीन गन्ना बुवाई से अधिक से अधिक करने का सुझाव दिया गया।तथा इस समय के गन्ना बुवाई के फायदो के बारें में भी किसानो को बताया गया।इस समय गन्ना बुवाई में किसान भाई गन्ने के साथ सहफसल में लाही, मसूर एवं आलू आदि की फसलें गन्ने के साथ ले सकते हैं। लेबर भी आसानी से मिल जाते हैं। पैदावार 30% अधिक मिलतीं है और रोग एवं कीङो का प्रकोप भी कम होता है।इसके अलावा क्षेत्र के खपुरवा एवं रमटेड़िया गांव में गन्ना की बुवाई कर रहे किसानों के प्लाटों का निरीक्षण किया गया। खपुरवा में सुंदर लाल वर्मा व अंगरेज वर्मा के खेत पहुंचकर किसानों को ट्रेंच विधि से गन्ना बुवाई के बारे में बताया गया। इस मौके पर क्षेत्रीय सुपरवाइजर शैलेंद्र सिंह एवं अमर बहादुर उपस्थित रहे।IBN24×7news
रिपोर्ट-सत्यपाल मौर्य
कैसरगंज
गन्ने की अगेती प्रजातियों की बुवाई के लिए भूमि उपचार एवं बीज उपचार आवश्यक है। यह बातें तहसील कैसरगंज के होलपारा में पारले चीनी मिल द्वारा एक आयोजित कृषक गोष्ठी में पारले चीनी मिल के गन्ना प्रबंधक संजीव राठी द्वारा की गई। जिसमें दर्जनों किसान मौजूद रहे। गोष्ठी का संचालन गन्ना अधिशासी रूचिन लाटियान द्वारा किया गया,एवं गोष्ठी का संबोधन पारले चीनी मिल के सहायक मुख्य गन्ना प्रबंधक संजीव राठी द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि किसानों को अच्छा उत्पादन लेने के लिए स्वस्थ बीज का चयन करना चाहिए ।जिससे फसल में किसी प्रकार का रोग बीमारी ना हो।इस समय कहीं-कहीं पर गन्ना खेतों में रेडराॅट 0238 गन्ना प्रजाति में दिखाई दे रहा है। इसलिए इस रोग से बचने के लिए गन्ना किसानों को खेत की तैयारी के समय 2 किलोग्राम ट्राइकोडरमा प्रति बीघा की दर से और दो बैग पारले गोल्ड जैविक खाद के साथ मिलाकर प्रयोग करना चाहिए। साथ-साथ बीज के उपचार लिए 100 ग्राम हेक्जास्टाप फंजीसाईड दवा एवं 100 ग्राम इमिडाक्लोरोप्रिड दवा एक साथ मिलाकर 100 लीटर पानी में घोल बना लें और गन्ने के टुकड़े को 5:00 मिनट तक उपचारित करके बुवाई करें, इससे रोग एवं कीड़ों की रोकथाम होगी और अधिक से अधिक उत्पादन गन्ना किसानों को मिल सकेगा। और इसके अलावा केवल अगेती प्रजाति ही बुवाई करें जिससे अधिक से अधिक उत्पादन किसानों को मिल सकेगा।जैसे
0238, 0118,08272 आदि। केवल दो आंख का टुकड़ा ही बुआई में प्रयोग करें इसके अलावा कृषकों को शरद कालीन गन्ना बुवाई से अधिक से अधिक करने का सुझाव दिया गया।तथा इस समय के गन्ना बुवाई के फायदो के बारें में भी किसानो को बताया गया।इस समय गन्ना बुवाई में किसान भाई गन्ने के साथ सहफसल में लाही, मसूर एवं आलू आदि की फसलें गन्ने के साथ ले सकते हैं। लेबर भी आसानी से मिल जाते हैं। पैदावार 30% अधिक मिलतीं है और रोग एवं कीङो का प्रकोप भी कम होता है।इसके अलावा क्षेत्र के खपुरवा एवं रमटेड़िया गांव में गन्ना की बुवाई कर रहे किसानों के प्लाटों का निरीक्षण किया गया। खपुरवा में सुंदर लाल वर्मा व अंगरेज वर्मा के खेत पहुंचकर किसानों को ट्रेंच विधि से गन्ना बुवाई के बारे में बताया गया। इस मौके पर क्षेत्रीय सुपरवाइजर शैलेंद्र सिंह एवं अमर बहादुर उपस्थित रहे।

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