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बेतुल, मध्यप्रदेश: बैतूल में बंपर वोटिंग, 78 फीसदी दर्ज हुआ मतदान

रिपोर्ट पुंकेश भटकरे ibn24x7news बेतुल, मध्यप्रदेश
बैतूल में बंपर वोटिंग, 78 फीसदी दर्ज हुआ मतदान, 9 कैंडिडेट हैं मैदान में
बैतूल लोकसभा सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है. इस सीट पर पिछले 8 बार से बीजेपी ही जीतती आ रही है. बीजेपी के दिग्गज नेता विजय कुमार खंडेलवाल यहां से 4 बार जीतकर संसद पहुंच चुके हैं. उनके निधन के बाद उनके बेटे हेमंत खंडेलवाल ने यहां पर जीत दर्ज की. यह सीट 2009 में परिसीमन के बाद अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित हो गई. पिछले दो लोकसभा चुनावों से बीजेपी की ज्योति धुर्वे यहां से जीतती आ रही हैं|

पुंकेश भटकरे प्रेस रिपोर्टर:>(बेतुल मध्यप्रदेश)

मध्य प्रदेश की बैतूल लोकसभा सीट पर मतदान के लिए मतदाताओं ने गजब का जोश दिखाया. यहां पर कुल 77.84 प्रतिशत मतदान हुआ है. लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में एमपी की सात सीटों पर औसतन 68.98 प्रतिशत मतदान हुआ है. यहां पर चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे. यहां पर भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी. इस लोकसभा सीट से कुल 9 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. बैतूल लोकसभा को भारतीय जनता पार्टी का मजबूत किला माना जाता है. फिलहाल इस सीट से बीजेपी की ज्योति धुर्वे सांसद हैं.

बैतूल लोकसभा सीट पर 4 बजे तक 62 फीसदी मतदान हो चुका है. हालांकि अंतिम आंकड़ा आने पर मतदान का प्रतिशत बदल सकता है.

बैतूल लोकसभा सीट पर दोपहर 2 बजे तक 49.95 फीसदी मतदान हो चुका है.

मध्यप्रदेश में लोकसभा का चुनाव करवा रहे दो कर्मचारियों की पिछले 48 घंटे में मृत्यु हो गई है. मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) वी एल कांता राव ने यहां संवाददाताओं को बताया कि पिछले 48 घंटे में चुनाव ड्यूटी में तैनात दो कर्मचारियों की मृत्यु हुई है. उन्होंने कहा कि सोमवार सुबह बैतूल में होम गार्ड जवान महेश दुबे का दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई. वहीं, चुनाव ड्यूटी में लगाये गये बैतूल कोटवार नंदू लाल नागले की भी दो दिन पहले मृत्यु हो गई. राव ने कहा कि महेश दुबे के परिजन को निर्वाचन आयोग ने 15 लाख रुपये की अनुग्रह राशि स्वीकृत की है और नंदू लाल के परिजन को भी हम सहायता राशि देंगे.

बैतूल लोकसभा सीट पर तेजी से मतदान चल रहा है. यहां 12 बजे तक 33.14 फीसदी मतदाता वोट डाल चुके हैं.

मध्य प्रदेश के बैतूल लोकसभा सीट पर मतदान जारी है. तेज धूप के बावजूद यहां मतदान के लिए लोग कतार में लगे हैं. 11 बजे तक यहां पर 15.78 प्रतिशत मतदान हो चुका है.

इस बार यहां से भारतीय जनता पार्टी ने दुर्गा दास डीडी उइके, कांग्रेस पार्टी ने रामू टेकम, बहुजन समाज पार्टी ने अशोख भालवी, बहुजन मुक्ति पार्टी ने पुष्पा मर्सकोले, अखिल भारतीय गोंडवाना पार्टी ने पुष्पा शैलेंद्र पेनदम और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने बिसराम उइके को चुनाव मैदान में उतारा है. इस लोकसभा सीट पर वोटों की गिनती 23 मई को होगी और इसके बाद चुनाव के नतीजे आएंगे. यहां पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है.

बैतूल लोकसभा सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है. इस सीट पर पिछले 8 बार से बीजेपी ही जीतती आ रही है. बीजेपी के दिग्गज नेता विजय कुमार खंडेलवाल यहां से 4 बार जीतकर संसद पहुंच चुके हैं. उनके निधन के बाद उनके बेटे हेमंत खंडेलवाल ने यहां पर जीत दर्ज की. यह सीट 2009 में परिसीमन के बाद अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित हो गई. पिछले दो लोकसभा चुनावों से बीजेपी की ज्योति धुर्वे यहां से जीतती आ रही हैं.

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ज्योति धुर्वे ने कांग्रेस के अजय शाह को मात दी थी. ज्योति धुर्वे को 6 लाख 43 हजार 651 यानी 61.43 फीसदी वोट मिले थे, तो कांग्रेस के अजय शाह को 3 लाख 15 हजार 37 यानी 30.07 फीसदी वोटों से संतोष करना पड़ा था. दोनों के बीच हार जीत का अंतर 3 लाख 28 हजार 614 वोटों का था. पिछले लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी 1.97 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थी.
इससे पहले साल 2009 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी के ज्योति धुर्वे ने जीत हासिल की थी. उन्होंने कांग्रेस के ओजाराम ईवाने को हराया था. ज्योति धुर्वे को 3 लाख 34 हजार 939 यानी 52.62 फीसदी वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के ओजाराम को 2 लाख 37 हजार 622 यानी 37.33 फीसदी वोटों से संतोष करना पड़ा था. दोनों के बीच हार जीत का अंतर 97 हजार 317 वोटों का था.

बैतूल लोकसभा सीट पर पहला चुनाव 1951 में हुआ. पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली. साल 1967 और 1971 के चुनाव में भी इस सीट पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी. साल 1977 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गई और भारतीय लोकदल ने पहली बार यहां जीत दर्ज की थी. हालांकि साल 1980 में कांग्रेस ने यहां पर वापसी की थी और गुफरान आजम यहां के सांसद बने थे. इसके अगले चुनाव 1984 में भी कांग्रेस को जीत मिली. बीजेपी ने पहली बार यहां पर जीत 1989 में हासिल की. आरिफ बेग ने कांग्रेस के असलम शेरखान को हराकर यहां पर बीजेपी को पहली जीत दिलाई.

इसके अगले चुनाव 1991 में असलम शेरखान ने 1989 की हार का बदला लिया था. उन्होंने इस चुनाव में आरिफ बेग को मात दे दी थी. साल 1996 में बीजेपी ने यहां पर फिर वापसी की थी और विजय कुमार खंडेलवाल यहां के सांसद बने थे. साल 1996 में यहां पर वापसी करने के बाद से ही यह सीट बीजेपी के पास है. विजय कुमार खंडेलवाल ने 1996, 1998, 1999 और 2004 के चुनाव में जीत दर्ज की थी.

विजय कुमार खंडेलवाल के निधन के बाद 2008 में यहां पर उपचुनाव हुए थे. उपचुनाव में विजय कुमार खंडेलवाल के बेटे हेमंत खंडेलवाल जीतकर यहां के सांसद बने थे. परिसीमन के बाद 2009 में यह सीट अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित हो गई थी.

साल 2009 में बीजेपी ने यहां से ज्योति धुर्वे को उतारा था. ज्योति धुर्वे पार्टी की उम्मीदों पर खरी उतरीं और जीत हासिल की थी. उन्होंने इसके बाद अगला चुनाव भी जीता. बैतूल लोकसभा सीट के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं. मुलताई, घोड़ाडोंगरी, हर्दा, अमला,भैंसदेही, हरसूद,बैतूल, तिमरनी यहां की विधानसभा सीटें हैं. इन 8 विधानसभा सीटों में से 4 पर कांग्रेस और 4 पर बीजेपी का कब्जा है.

बैतूल जिला मध्य प्रदेश के दक्षिण में स्थित है. इसका अपना एक धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है. यहां पर लंबे वक्त तक मराठाओं और अंग्रेजों ने राज किया. बैतूल जिला नर्मदा संभाग के अंतर्गत आता था. 2011 की जनगणना के मुताबिक बैतूल की जनसंख्या 24 लाख 59 हजार 626 है. यहां की 81.68 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 18.32 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है.

यहां की 40.56 फीसदी आबादी अनुसूचित जनजाति के लोगों की है और 11.28 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति के लोगों की है. चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां पर 16 लाख 7 हजार 822 मतदाता थे. इनमें से 7 लाख 70 हजार 987 महिला मतदाता और 8 लाख 36 हजार 835 पुरुष मतदाता थे. साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर 65.16 फीसदी मतदान हुआ था.

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