Breaking News
Home / Highlight's / कोरोना  वायरस (कोविड19): प्राकृतिक आपदा का  विकराल रूप

कोरोना  वायरस (कोविड19): प्राकृतिक आपदा का  विकराल रूप

 

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमणों को देखते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है। WHO का मानना है कि महामारी का आगाज़ चीन के हुवेई प्रांत के वुहान शहर के एक सी-फूड बाज़ार से हुआ।यह वायरस सी-फूड में  प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कोरोना वायरस विषाणुओं की प्रजाति से है जो पशुओं से इंसानों में आया। सामान्य जुकाम में भी इसके संक्रमण से गंभीर सांस या फेफड़े संबंधी रोग हो सकते हैं।

1937 में पक्षियों में एक संक्रामक ब्रोंकाइटिस वायरस से पहली बार कोरोना वायरस को अलग किया गया था जो मुर्गी पालन उद्योग को गंभीरता से नष्ट करने की क्षमता रखता था। ह्यूमन कोरोना वायरस ( HCoV)की पहचान पहली बार 1960 के दशक में आम सर्दी जुकाम के रोगियों में हुई थी। ह्यूमन करोना वायरस दो प्रकार के होते हैं OC43 और 229E। लैटिन भाषा में  कोरोना का अर्थ है हेलो या क्रॉउन। यह नाम उसको उसके वाह्य क्षेत्र पर मौजूद मुकुट जैसे संरचना के आधार पर दिया गया है। वर्तमान में सात प्रकार के कोरोना वायरस हैं जो मनुष्यों को संक्रमित कर सकते हैं। सामान्य प्रकारों में शामिल हैं: अल्फा कोरोना वायरस (229E), अल्फा कोरोना वायरस (NL63), बीटा कोरोना वायरस (OC43) और बीटा कोरोना वायरस (HKU1)।

दुर्लभ और अधिक खतरनाक वायरस प्रकारों में शामिल है, MERS-CoV जो मध्य पूर्व श्वसन सिंड्रोम  (MERS) और गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम (SARS-CoV)। वर्तमान में जो कोरोना वायरस चीन से शुरू होकर के कई देशों में महामारी का कारण बना हुआ है, उसे विश्व स्वास्थ्य अधिकारी 2019 नोबेल कोरोना वायरस (2019-nCoV) के रूप में संदर्भित कर रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार कोरोना विषाणु छूत की बीमारी है। अतः ये वायरस बेहद आसानी से किसी को भी संक्रमित कर सकता है। चूँकि यह वायरस फेफड़ों को संक्रमित करता है, इसलिए संक्रमित व्यक्ति खांसते समय सामने मौजूद व्यक्ति को भी इस बीमारी से संक्रमित करा सकता  है। संक्रमित होने के कम से कम 14 दिनों बाद इसके लक्षण दिखने शुरू होते हैं। कोरोना वायरस के मरीज़ों में आमतौर पर जुखाम, खांसी, गले में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, बुखार जैसे शुरुआती लक्षण देखाई देते हैं। कोरोना वायरस के लक्षण स्वाइन फ्लू से भी मिलते हैं। दोनों से संक्रमित लोगों में नाक बहना, बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, सिर में तेज दर्द, निमोनिया, ब्रॉन्काइटिस और गले में खराश जैसी समस्याएं उत्पन्न होती है।

 कोरोना वायरस निम्नलिखित तरीकों से संक्रमण कर सकता है-

मुंह को ढके बिना खांसने और छीकनें से संक्रमित व्यक्ति वायरस फैलाने वाले सूक्ष्म तत्वों को हवा में फैला सकता है।

संक्रमित व्यक्ति से हाथ मिलने से।

संक्रमित वस्तु के  संपर्क में आने और फिर अपनी नाक आंख, मुंह को छूने से

दुर्लभ अवसरों पर कोरोना वायरस मल के संपर्क में आने से फैल सकता है।

कोरोना वायरस संक्रमण (SERs-CoV) नवंबर 2002 में दक्षिणी चीन के गुआंगडोंग प्रांत से प्रारंभ हुआ और आखिरकार हांगकांग तक पहुंच गया था। वहां से यह तेजी से दुनिया भर में फैल गया। अब तक 37 देशों में लोगों को यह संक्रमित कर चुका है। यह वाह्य और आंतरिक दोनों श्वसन तंत्रों को संक्रमित कर सकता है और गैस्ट्रोएन्टराइटिस का कारण भी बन सकता है। सार्स के लक्षण 1 सप्ताह के दौरान विकसित होते हैं। बीमारी की शुरूआत में लोगों में फ्लू जैसे लक्षण विकसित होते हैं जैसे सूखी ख़ासी, ठंड लगना, दस्त, सांस फूलना, निमोनिया, आदि। अंतिम चरण में ये वायरस फेफड़ों, हृदय या यकृत की विफलता का कारण बन। 2002 महामारी के दौरान 774 मृत्यु के साथ कुल 8098 मामले दर्ज किए गए थे। वृद्धों  और वयस्कों में जटिलताओं की संभावनाए अधिक रहती है। अंततः इसे जुलाई 2003 में नियंत्रित किया गया।

MERS-CoV  को मार्च 2012 में पहली बार मान्यता दी गई थी। ये गंभीर सांस की बीमारी पहली बार सऊदी अरब में सामने आई थी और तब से यह दूसरे देशों में लगातार फैल रही है। यह वायरस यूएस तक पहुंच गया था और अरब प्रायद्वीप के बाहर सबसे बड़ा प्रकोप दक्षिण कोरिया में 2015 में हुआ था। संक्रमित लक्षणों में बुखार, सांस फूलना और ख़ासी शामिल है। बीमारी उन लोगों के साथ निकट संपर्क से फैलती है जो पहले से संक्रमित हो चुके हैं। हालांकि MERs के सभी मामले उन व्यक्तियों से जुड़े the जो हाल ही में अरब प्रायद्वीप की यात्रा से लौटे थे।

कोरोना वायरस (2019-nCoV) का अभी तक कोई इलाज नहीं उपलब्ध है। एंटीबायोटिक दवायें विषाणुओं से नही जीवाणुओं से लड़तीं हैं, इसलिए इनका उपयोग कोरोना वायरस के लिए व्यर्थ  है। डॉक्टरों की लड़ाई एक ऐसे अनजाने दुश्मनों के ख़िलाफ़ है जिनकी प्रकृति या सामर्थ्य का कोई विवरण उपलब्ध नही। ये वायरस आपके शरीर को किस प्रकार संक्रमित करता है या संक्रमण के बाद किस तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं, ये जानकारी भी उपलब्ध नही। पहली बार कोरोना वायरस से संक्रमित 99 मरीज़ों पर किये गए शोध को लांसेट मेडिकल जर्नल में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है।

चीन के वुहान शहर के जिन्यिन्तान हॉस्पिटल और विभिन्न देशों में इस महामारी का इलाज कर रहे डॉक्टरों की टीम ने अब इन सवालों का जवाब तलाशने शुरू कर दिया है। लेकिन जब पहली दस्तक मिली थी, तब विषाणुओं से लड़ने की वजह चीनी सरकार उन लोगों के खिलाफ कार्यवाही कर रही थी जिन्होंने लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया था। लोगों को अंधेरे में रखने का ही परिणाम है कि कोरोना वायरस (2019-nCoV या कोविड 19) विभिन्न देशों में महामारी फैला रहा है। चीन के अलावा यह वायरस थाइलैंड, जापान, मलेशिया, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रलिया और संयुक्त अरब अमीरात तक फैल चुका है। इस वायरस को एक देश से दूसरे देश में संक्रमण फैलाने के लिए पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नही। आज टेक्नोलॉजी इतनी विकसित है कि वायरस के संक्रमण भी इंटरनेट की गति से होते हैं और पूरी दुनिया को इसका गलत परिणाम भुगतना पड़ता है। इस वायरस ने चीन को तोड़ कर रख दिया है। लगातार कोशिशों के बावजूद चीन में कोरोना वायरस की चपेट में आने वालों व्यक्तियों की मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। मात्र एक ही दिन में, 12 फरवरी 2020, 242 लोगों की मौत हो गई। आंकड़ों की मानें तो चीन में करीब 50 हजार से ज्यादा लोग इन जानलेवा वायरस की चपेट में हैं।

चीन में कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ने से दुनियाभर Jके बाजारों में भी मंदी का माहौल है। कृषि बाजार भी प्रभावित हुआ है। पाम तेल के दाम में आई भारी गिरावट से भारत में  तेल-तिलहनों के दाम में मंदी छा गई है। ऐसे में किसानों की परेशानी बढ़नी स्वाभाविक है क्योंकि सरसों व अन्य तिलहन की नई फसलों का उनको उचित दाम नहीं मिल पाएगा। कोरोना वायरस (कोविड-19) ने चीन के वाहन उद्योग को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है।

इस वायरस का कोई इलाज अभी तक उपलब्ध नहीं है। इसलिए उपचार में अपना ध्यान रखना और over-the-counter (ओटीसी) दवायें ही उपयोग कर सकते हैं। संक्रमण होने पर पूरा आराम करें और  overexertion से बचें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिए और धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों से बचें। दर्द और बुखार कम करने के लिए एसिटामिनोफेन, ईब्रूफेन या नेप्रॉक्सेन लें। भीड़ भाड़ वाली जगहों पर न जायें।

लगभग 18 साल पहले सार्स वायरस के कारण भी विश्व ने 2002-2003 में ये भयावह स्थिति देखी थी और उस लड़ाई पर विजय पाई थी। अतः यह गंभीर स्थिति अपना आपा खोने की और यह सोचने की नहीं है कि यह वायरस किस व्यक्ति या देश की गलती से मानव जाति को संक्रमित कर पाया, बल्कि ये निश्चित करने की है कि विश्व अपनी संपूर्ण ऊर्जा और सामर्थ्य   इस संक्रमण को रोकने में लगाये। कहते हैं ” prevention is better than cure” यही मूल मंत्र लोगों को इस महामारी से बचा सकता है क्योंकि समाधान खोजने में वक़्त लग सकता है।

 

डॉ ऋतु श्रीवास्तवा IBN NEWS

 

About IBN NEWS

It's a online news web channel running as IBN24X7NEWS.

Check Also

घर से करें काम, एक माह तक मुफ्त नेट देगा BSNL

लॉकडाउन के दौरान BSNL (भारत संचार निगम लिमिटेड) टेलीफोन उपभोक्ता घर बैठे बोर नहीं होंगे। …

इंदौर में कोरोना पॉजिटिव 17 मरीज लगभग हुए ठीक, 4 की पहली जांच रिपोर्ट नकारात्मक आई

    इंदौर में कोरोना पॉजिटिव 17 मरीज लगभग हुए ठीक, 4 की पहली जांच …

शाहजहांपुर में कोराेना का पहला मामला आया सामने, थाईलैंड का एक जमाती मिला कोरोना पॉजीटिव

  शाहजहांपुर। जिले में कोरोना का पहला मामला सामने आया है। दिल्ली के निजामुद्दीन से …

बीमारी से परेशान होकर फांसी के फंदे पर झूल युवती ने की आत्महत्या

  कैसरगंज थाना क्षेत्र के जै सिंह पुर के मजरा गुलालपुरवा गांव में बृहस्पतिवार की …

जीवाणा में राशन डीलर द्वारा डोर टू डोर रसद सामग्री की वितरित

क्या आपको खाद्य सुरक्षा के तहत घर पर रसद सामग्री मिली ? , जीवाणा में …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WhatsApp For any query click here