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हरियाणा :-भगवान परशुराम जयंती पर लोगों में सत्तू का प्रसाद वितरण किया गया

फरीदाबाद से बी.आर.मुराद की रिपोर्ट

फरीदाबाद:अखिल भारतीय मानव कल्याण ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पेंद्र शर्मा,महासचिव महेश शर्मा वत्स,उपाध्यक्ष कुंवर लखन रावत,राष्ट्रीय महामंत्री हयदेश सिंह,मीडिया प्रभारी संजय शर्मा,कोषाध्यक्ष मधु शर्मा, सलाहकार राजीव गुप्ता,महामंत्री जितेंद्र कुमार,निगरानी कमेटी की सदस्य मेडम राजबाला

शर्मा,सेविका संगीता नेगी,उर्मिला फोजदार,मनीषा देवी,बेबी देवी, मलिक,विमलेश देवी,पुष्पेन्द्र सिंह, सत्यम कुमार,राजीव गुप्ता, रामपाल सिंह सेंगर,नरेश यादव, दीपक,दिगेंद्र पंडित,रामपाल सिंह,नत्थी नगर,अनिल वर्मा,मनोज चौधरी,अनिल वर्मा, मनोज शर्मा,अजय,चरण सिंह, मोहर्राम पंडित,राम प्रकाश, रामधन जांगिड़,डॉ महेंद्र भारद्वाज,नीरज भारद्वाज,अंकित सिंगल महेश शर्मा भूपेश,राजेश शर्मा,वेदवीर सिंह,नीरज कुमार व अन्य बहुत से लोग उपस्थित रहे

ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पेंद्र शर्मा जी ने कहा कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम की जयंती है। पराक्रम के प्रतीक भगवान परशुराम का जन्म 6 उच्च ग्रहों के योग में हुआ था। जय भगवान परशुराम की! ट्रस्ट के राष्ट्रीय महामंत्री ह्रदयेश सिंह ने कहा कि परशुराम त्रेता युग रामायण काल के एक ब्राह्मण थे।

उन्हें विष्णु का छठा अवतार भी कहा जाता है । पौरोणिक वृत्तान्तों के अनुसार उनका जन्म भृगुश्रेष्ठ महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को हुआ था। वे भगवान विष्णु के छठे अवतार थे। पितामह भृगु द्वारा सम्पन्न नामकरण संस्कार के अनन्तर राम,जमदग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य और शिवजी द्वारा प्रदत्त परशु धारण किये रहने के कारण वे परशुराम कहलाये।

आरम्भिक शिक्षा महर्षि विश्वामित्र एवं ऋचीक के आश्रम में प्राप्त होने के साथ ही महर्षि ऋचीक से सारंग नामक दिव्य वैष्णव धनुष और ब्रह्मर्षि कश्यप से विधिवत अविनाशी वैष्णव मन्त्र प्राप्त हुआ। तदनन्तर कैलाश गिरिश्रृंग पर स्थित भगवान शंकर के आश्रम में विद्या प्राप्त कर विशिष्ट दिव्यास्त्र विद्युदभि नामक परशु प्राप्त किया। शिव जी से उन्हें श्री कृष्ण का त्रैलोक्य विजय कवच स्तवराज स्तोत्र एवं मन्त्र कल्पतरु भी प्राप्त हुए। चक्रतीर्थ में किये कठिन तप से प्रसन्न हो भगवान विष्णु ने उन्हें त्रेता में रामावतार होने पर तेजोहरण के उपरान्त कल्पान्त पर्यन्त तपस्यारत भूलोक पर रहने का वर दिया।

ट्रस्ट के राष्ट्रीय महासचिव महेश शर्मा ने कहा कि भगवान परशुराम किसी समाज विशेष के आदर्श नहीं है। वे संपूर्ण हिन्दू समाज के हैं और वे चिरंजीवी हैं। उन्हें राम के काल में भी देखा गया और कृष्ण के काल में भी। उन्होंने ही भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र उपलब्ध कराया था। कहते हैं कि वे कलिकाल के अंत में उपस्थित होंगे। ऐसा माना जाता है कि वे कल्प के अंत तक धरती पर ही तपस्यारत रहेंगे।

पौराणिक कथा में वर्णित है कि महेंद्रगिरि पर्वत भगवान परशुराम की तप की जगह थी और अंत वह उसी पर्वत पर कल्पांत तक के लिए तपस्यारत होने के लिए चले गए थे। ट्रस्ट की राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मधु शर्मा ने कहा कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम की जयंती है। पराक्रम के प्रतीक भगवान परशुराम का जन्म 6 उच्च ग्रहों के योग में हुआ था।

व इस वर्ष 2019 में परशुराम जयंती7 मई 2019, मंगलवार को है. यह दिन सिंहस्थ के पर्व का भी है. इसलिए इस दिन की मान्यता और भी अधिक बढ़ जाती है.तो आइये हम सब भी इस दिन भगवान परशुराम की पूजा में शामिल हो कर परशुराम भगवान का आशीर्वाद प्रकट करें l

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