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अब आप के बच्चे भी बन सकते है बुद्धिजीवी-ओमप्रकाश चौहान

विकास कुमार श्रीवास्तव IBN 24×7 बलरामपुर

जनपद बलरामपुर के विकास खण्ड रेहरा बाजार के ग्रामपंचायत जखौली में प्रथम प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया गया| जिसमें विदेश की तकनीक से अब सभी बच्चे जीनियस बन सकते है,यह बाते मानसिक विकास प्रशिक्षण संस्थान के काउंसलर व प्रशिक्षक ओम प्रकाश चौहान ने बताया और आगे कहा कि बच्चों के फिंगर प्रिंट के मनोवैज्ञानिक अध्ययन द्वारा वैज्ञानिक करियर काउंसिलिंग का कार्य संस्था द्वारा डी0एम0आई0टी0 अर्थात डर्मेटोग्लैफिक मल्टिपल इंटेलीजेंस रिपोर्ट नामक जांच के माध्यम से किया जाता है।जिससे मानव मस्तिष्क की संचरना व सक्रियता के साथ अन्य कई आवश्यक सूचनाओं की जानकारी प्राप्त होती है|

इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि व्यक्ति का व्यक्तित्व किस प्रकार का है और मस्तिष्क का आई0क्यू0, ई0क्यू0, ए0क्यू0, सी0क्यू0 आदि का स्तर क्या है| डी0एम0आई0टी0 टेस्ट के बाद संस्था 5 साल से 15 साल के बीच के बच्चों का प्रवेश लेकर साप्ताहिक रूप से 5 से 6 घण्टे का प्रशिक्षण प्रदान करती है| संस्था डी0एम0आई0टी0 परीक्षण के बाद वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए पिनियल ग्लैण्ड एक्टीवेशन या मिड माइंड एक्टीवेशन, ई0एस0पी0, फोटोग्राफिक व क्यू0एस0आर0 नाम की अलग- अलग कोर्स कराये जाते है।

जिसके उपरांत बच्चों की ज्ञानेंद्रियां पूर्ण रूप से सक्रिय हो जाती है और बच्चे सूंघकर, सुनकर व स्पर्शकर कर हर प्रकार के रंगों की जानकारी के साथ साथ वस्तुओं की जानकारी करने लगते है।संस्था के सभी कोर्स को साप्ताहिक रूप से लगभग 1 वर्ष में पूर्ण कराया जाता है।जिससे बच्चे की एकाग्रता में वृद्धि अर्थात बच्चा लंबी देर तक पढाई करने की क्षमता प्राप्त कर लेता है।बच्चें को गणित, विज्ञान व भाषा की बारीक बातें समझ में आने लगती है।लंबे प्रश्नों के उत्तर याद रहने लगते है। प्रश्नों के उत्तर पुस्तक के किस पृष्ठ पर लिखे है, विजुलाईज होने लगते है।जिसे कि फोटोग्राफिक मेमोरी कहते है। यह बच्चों की इच्छा शक्ति बढ़ती है।बच्चा आंख बंद करके लोगों के सामने चीजे पहचानता है

तो उसमें आत्मविश्वास और आत्मगौरव की भावना बढ जाती है।लोगों के सामने अपनी क्षमताओं को प्रकट करने का साहस विकसित हो जाता है। स्टेज पर अपनी बात विश्वास पूर्वक कहने की हिम्मत हो जाती है।एक्सप्लानेशन पावर बढ़ जाती है जिससे विषय को विस्तार पूर्वक बताने व लिखने की क्षमता विकसित हो जाती है।बच्चों में जिम्मेदारी की भावना विकसित हो जाती है।बच्चे में पहल करके काम करने की रूचि जागृति हो जाती है।बच्चे में माता-पिता, अध्यापकों व बडों के प्रति आदर की भावना विकसित हो जाती है। सभी से मैत्री पूर्ण संबंध बनाने की भावना विकसित हो जाती है।

बच्चे के अन्दर से सुरक्षा व प्रसन्नता का भाव आता है। इसलिए दूसरों से ईर्ष्या व जलन खत्म हो जाती है। विश्लेषण करने की क्षमता बढ जाती है। अनुभव में आया कि बच्चों की अंग्रेजी भाषा पर पकड अनायास बढ जाती है।कृतज्ञता की भावना व प्रकट करने की इच्छा विकसित होती है।बच्चा प्रसन्न व साहसिकता का मनोभाव रखता है।

बच्चे में खेलकूद व अन्य नई-नई खूबी विकसित होती है।बच्चें में नई ऊँचाइयां को छूने की ललक पैदा हो जाती है।बच्चों का सर्वागीण विकास होता है जिससे माता पिता व अध्यापक अभिभूत होते है तथा बच्चे में आत्म विश्वास छलकने लगता है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष व उच्च प्राथमिक विद्यालय गैण्डास बुजुर्ग के प्रधानाध्यापक अशोक कुमार चौहान ने फीताकाट कर केंद्र का उद्घाटन किया।इस अवसर पर हीरालाल वर्मा,रमेश चौहान,मो0 राशिद,पवन कुमार चौहान, आलोक कुमार,राज कुमार श्रीवास्तव,पारस नाथ वर्मा,शिव प्रसाद,हनुमान प्रसाद वर्मा, अरविंद कुमार मिश्रा,सांवल प्रसाद यादव आदि के साथ आसपास के अभिभावकगण भी मौजूद रहे|

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