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कवि नवीन नव ने बनाई मेवाड़ के प्रसिद्ध गढ़ो में से एक मांडलगढ़ पर कविता

बिगोद 7 नंबर–  बीगोद निवासी राजकीय माध्यमिक विद्यालय मेहता जी का खेड़ा में कार्यरत विज्ञान विषय के वरिष्ठ अध्यापक नवीन कुमार बाबेल जो कि नवीन नव नाम से कविता ,गीत लिखते है । बाबेल ने
राजस्थानी भाषा का पुट लिए  अपनी नई रचना बनाई है जिसमें मांडलगढ़ किले के इतिहास और स्थित स्थानों के बारे में प्रकाश डाला है ।

कविता का शीर्षक ‘ मान प्यारो लाग सा माकॊ यो मांडलगढ़ ‘ रखा है । मांडलगढ़ नाम के पीछे चली अा रही किवदंती ,राणा सांगा के अंतिम संस्कार , किले पर स्थित सागर ,सागरी जल स्त्रोत , बिसोत माता मंदिर ,मदीना मस्जिद ,आदि के बारे में बताया गया है ।

कविता में मांडलगढ़ किले को मेवाड़ के प्रमुख तीन गढो में से एक बताया है । ज्ञात रहे बाबेल ने कॉलेज में अध्ययनरत रहते 2006 में आजादी की 59 वी वर्षगांठ पर तर्क ए हिंदुस्तान नाम से पुस्तक लिखी थी जिसमे स्वरचित 45 कविताओं का संग्रह है । 2018 में राज शपथ कुरीतियों का अंत अभियान चलाया है बाबेल ने राज शपथ बनाई थी यह शपथ 8000 विद्यार्थी ऑर शिक्षक ले चुके है शपथ में मृत्यु भोज , कन्या भ्रूण हत्या ,बाल विवाह न करने अंधविश्वास दूर भगाने,बालिका शिक्षा ,वृक्षारोपण को बढ़ावा देने आदि समाजिक कार्यों में भाग लेने के प्रति जागरूकता का संदेश समाहित है ।बाबेल नेत्र दान जागरुकता अभियान भी चला रहे है बाबेल के पूरे परिवार ने मृत्यू पश्चात नेत्रदान का संकल्प भी लिया है ।

कविता
मान प्यारो लाग सा माकॉ यो
मांडलगढ़

रचयिता नवीन नव ( नवीन कुमार बाबेल( व. अ.) राजकीय माध्यमिक विद्यालय मेहता जी का खेड़ा

मेवाड़ म गणा ही गढ़ है ।
वा म तीन है ,महागढ़ ।।
एक चित्रांगद को चितौड़ है ।
दूजो कुम्भा को कुंभलगढ़ ।।

मान प्यारो ,लाग सा ।
माको यो ,मांडलगढ़ !!

चित्तौड़गढ़ गांव ,पद्मिनी री गाथा ! कुंभलगढ़ ,राणा प्रताप री ।।
मांडलगढ़ गाव ,है गाथा ।
सांगा ,रा प्रताप री ।।

छह किलोमीटर म , फैल्यो ,यो ।
अठारासो फीट ,उच्चो , है ।।
उदयपुर ,सू सो मील ।
उतर पूरब म , बस्सो है यो ।।

लोग खेव मांड्या भील क नाम प
मांडलगढ़ ,कहलाव है ।।
पाषाण ख़ेव ,इको नाम तो ।
आकृति क कारण है ।।

जो भी कारण ,हो इक पाछ ।
माका , मनडा न,भाव सा ।।
मान ,प्यारो लाग सा ।
माकों यो मांडलगढ़ ।।

वृत्ताकार दुर्ग , यो कहलाव।
सात दरवाजा , इम है ।।
दो ,रास्ता मु ,जाव उपरण ।
मोड़ गणा ही विकट है ।।

कोई खेव चानणा ,गुजर बनायो ।
कोई खेव , अजमेर रा , चौहान रो
जो भी बनायो आच्छो बनायो ।
माको यो मांडलगढ़ ।।

राठौड़ रामसेन ,मोरध्वज ।
और मेहता जी का महल है अठ
चामुंडा माता , तोप कचहरी ।
जैन मंदिर है अठ ।।

एक तरफ बिराजे बीसोत माता !
दूजी ,तरफ ,मदीना मस्जिद है ।।
हिन्दू और मुस्लिम रो , एको ।
मांडलगढ़ क ,माही है ।।

सागर है , सागर सु गहरो ।
जालेश्वर हिलोरा , लेव है ।
ग्यारह सो, बरानवे माही ।
हरिराज चौहान रो शासन हो ।।

कुतुबुद्दीन, हरिराज सु छिनो ।
हाड़ौती रा चौहान , उसु छिनों ।।
क्षेत्रसिंह का शासन म यो।
मेवाड़ माही आयो रे ।।

तेरह सौ छत्तीस माही,गुजरात सु
जफर खा , धावो बोलो ।।
राणा मोकम , दी पटकनी ।
अटू सु ,भगा डालयो ।।

चौदह सौ तैतीस म कुम्भा आयो
बेरीसाल न ,हरायो र ।।
फाचो मांडलगढ़ न ।
मेवाड़ माही , मिलायो र ।।

चवदह सौ छप्पन म मालवा सु
महमूद खिलजी किदो प्रहार ।।
दस मीना लाग्या खिलजी न ।
जद ,मांडलगढ़ ,जीत सक्यो ।।

पद्रह सौ सताइस म राणासांगा
और बाबर म युद्ध हुयो घमासान
शीश कटया पर झुक्या नहीं ।
मारया दो दो न इक साथ ।

उटिनू ,बारूद बरस रया था ।
अटिन मर्दा री थी खान ।।
फिर भी फाच न हटया ।
जय मेवाड़ी ,जय मेवाड़ ।।

खूब लड्या ,पर जीत न पाया
युद्ध हारया ,मनड़ा जीत्या ।
सांगा ली सौगंध चित्तौड़ न जाऊ
जद तक बाबर न धूल न चटाऊ

इन बाद बाबर चंदेरी म ,आयो ।
सांगा सुनता ही कर दी चढ़ाई ।।
भाग् न मंजूर ,कुछ और हो ।
इरिज म सांगा ,की अंत घड़ी आई

सांगा न ,मांडलगढ़ लाया ।
अट हुई ,अंतिम विदाई ।।
मांडलगढ़ सांगा री गाथा ।
रग रग म ,जोश लाव है ।।

मेवाड़ म गणा ही गढ़ है ।
वा म तीन है ,महागढ़ ।।
एक चित्रांगद को चितौड़ है ।
दूजो कुम्भा को कुंभलगढ़ ।।

मान प्यारो ,लाग सा ।
माको यो, मांडलगढ़।!

 

रिपोर्ट प्रमोद गर्ग ibn24x7news बीगोद राजस्थान

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