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वाराणसी: मोदी की काशी मे प्रशिक्षु युवतियों से छेडछाड,3 सौ से अधिक महिला रंगरुटो ने दिया थरना

मोदी की काशी मे प्रशिक्षु युवतियों से छेडछाड,3 सौ से अधिक महिला रंगरुटो ने दिया थरना

वाराणसी। पुलिस लाइन में बुधवार की सुबह उस समय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया जब महिला प्रशिक्षु पुलिस कर्मी अपनी सुरक्षा को लेकर बैरक से बाहर निकल आईं और सड़क पर चक्‍काजाम कर‍ दिया। महिला प्रशिक्षु पुलिस कर्मी जब बाहर निकल कर सड़क पर चक्काजाम करने लगीं तो अधिकारियों को पता चला और आनन-फानन अधिकारी मौके पर पहुंचे और उनकी समस्‍या के निस्‍तारण का भरोसा दिया।

रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर पुलिस लाइन में प्रशिक्षण हासिल कर रही 347 महिला रंगरूट सिपाहियों ने बुधवार सुबह छेड़खानी के विरोध में धरना दे दिया। ये रंगरूट पुलिस लाइन प्रयागराज में 15 दिन की शुरुआती ट्रेनिंग के बाद तीन रोज पहले रविवार को वाराणसी आई हैं।

पुलिस लाइन गेट के सामने धरने पर बैठी महिला रंगरूट का आरोप है कि रात में किसी बाहरी युवक ने बैरक की खिड़की से हाथ डालकर छेड़छाड़ की। शोर मचाने पर भाग गया।

रात में पता चलने पर भी आरआई नहीं आए इसलिए ट्रेनी सिपाहियों का गुस्सा और बढ़ गया। इनका कहना है कि परसों यानी सोमवार रात भी कोई युवक आया था जो शोर मचाने पर भाग गया। ये भी आरोप लगाया कि सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था या पुलिसकर्मियों की तैनाती नहीं है। दीवार छोटी होने से बाहरी अराजक तत्व आ रहे हैं। बैरक से बाथरूम दूर है। बाथरूम भी खुला है जहां बाहरी लड़के तांक झांक करते हैं। दरअसल यह बैरक पुरुष ट्रेनी सिपाहियों के लिहाज से बना है जिसमें महिला रंगरूट को ठहरा दिया गया है।

दरअसल प्रशिक्षु पुलिस कर्मियों का आरोप था कि रात में अराजक तत्‍वों द्वारा छेड़खानी की जाती है, उनकी समस्‍या का समाधान न होते देखकर ही वह प्रदर्शन को बाध्‍य हुई हैं। पुलिस लाइन के सामने करीब आधे घण्टे तक इस दौरान चक्काजाम रहा। सीओ लाइन (आईपीएस) डॉ. अनिल कुमार किसी तरह महिला रंगरूटों को मनाकर पुलिस लाइन के भीतर ले गए जहां एसएसपी आंनद कुलकर्णी ने उन्हें समझाया कि बाहरी लड़के नहीं आने पाएं ये सुनिश्चित किया जाएगा।

साथ ही चेतावनी दी कि पुलिस एक अनुशासित विभाग है। कोई परेशानी है तो अपने अधिकारियों से शिकायत करनी चाहिए, इस तरह से धरना प्रदर्शन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। प्रशिक्षुओं ने बाउंडरी वाल, लाइट, असुरक्षा की समस्या अधिकारियों के समक्ष रखी। एसएसपी ने सुरक्षा की गारंटी दी और तय हुआ कि महिला अधिकारी की अब ड्यूटी लगेगी।

पूर्व में सुभाष चंद्र बोस छात्रावास में लड़कों की ट्रेनिंग होती थी। इस बार वहां ट्रेनिंग के लिए उसमे लड़कियों को रखा गया है। छात्रवास की बाउंडरी टिन की है जिससे रात के समय कोई लड़का घुस आया था। प्रकाश की समुचित व्यवस्था ना होने, खिड़की होने मगर उसमें सीसा न होने, बाउंडरी ना होने से प्रशिक्षुओं को असुरक्षा की भावना महसूस होने से सुबह यह प्रदर्शन हुआ।

बताया कि ड्यूटी रजिस्टर पर कई सीओ से लेकर सिपाही तक पुरुष व महिला पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है लेकिन मौके पर कोई नही रहता है।

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