गोरखपुर: डकैत बना भूमाफिया, पत्रकार की जमीन कब्ज़ा करने पहुंचा जेसीबी लेकर

डकैत बना भूमाफिया, पत्रकार की जमीन कब्ज़ा करने पहुंचा जेसीबी लेकर
जयपुर पुलिस की निशानदेही पर तिवारीपुर पुलिस ने किया था गिरफ्तार
पिपराइच पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन नही रुके जेसीबी के पहिये, पुलिस कप्तान के हस्तक्षेप के बाद भागे अपराधी
गोरखपुर – पत्रकार के मकान को दबंगों द्वारा कब्जा करने के प्रयास के दौरान मौके पर आस पास की जमीनों पर जेसीबी मशीन से धडल्ले से खुदाई की गई और बाग के हरे पेड़ों को जेसीबी से रौंदा गया। करीब 20 से 25 की संख्या में दबंग किस्म के मनबढ़ वहां मौजूद थे जिनमें से कुछ के पास असलहे भी देखे गए। सबसे हास्यास्पद बात यह है कि पिपराइच के थानेदार मौके पर पहुंचे और एसपी (नार्थ) को दैनिक जनसंदेश के पत्रकार नरसिंह प्रजापति के मकान की दीवार दबंगों द्वारा गिराने की जानकारी दी गई लेकिन न तो जेसीबी के पहिये थामें न ही भूमाफियाओं के हौसले पस्त हुए। बताते चलें कि बरकत अली पुत्र शौकत अली अपने सहयोगी देवेंद्र सिंह के साथ 20 से 25 की संख्या में अन्य मनबढ़ों को लेकर उक्त जमीन पर कब्ज़ा करने के प्रयास में थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बरकत अली एक माफिया किस्म का व्यक्ति है जो राजस्थान के जयपुर शहर के थाना संजय सर्किल में लगभग 1.5 किग्रा0 सोने की डकैती में शामिल था। इस शातिर अपराधी को राजस्थान पुलिस।की निशानदेही पर तिवारीपुर थाना की पुलिस टीम ने इलाहीबाग चौराहे के पास से गिरफ्तार किया था। अभियुक्त बरकत अली पुत्र शौकत अली जो मूल रूप से भरपही थाना सहजनवा गोरखपुर का निवासी जिसको तिवारीपुर थाना के इलाहीबाग में सुजात अली के मकान से पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस अभियुक्त के खिलाफ थाना संजय सर्किल जनपद जयपुर राजस्थान में अपराध संख्या 164/04 धारा 395, 365 171, 120बी के तहत दर्ज पंजीकृत है और जयपुर पुलिस को इस व्यक्ति की तलाश थी। वर्तमान में यह अपराधी जेल से बाहर है और अब बड़े पैमाने पर ज़मीनों का कारोबार कर रहा है जिसके लिए वह अपने गिरोह की मदद से बड़े पैमाने पर ज़मीनों पर कब्ज़ा करने की कार्यवाह को अंजाम दे रहा है। जब इसकी सूचना पुलिस कप्तान को हुई तो उन्होंने तत्काल हस्तक्षेप कर काम को रोकवा दिया। यह भी बताना ज़रूरी है कि उक्त जमीन शहर के सब्ज़पोश परिवार की है और फिलहाल सम्बंधित जमीन कानूनी दावं पेंच में उलझी है व उसको रजिस्ट्री करने का अधिकार न्यायालय के फैसले के अधीन है।

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