बेतिया(बिहार) – सिविल सर्जन बेतिया ने स्वास्थ्य सचिव एवं जिला पदाधिकारी को दवा खरीद घोटाले में लेखा प्रबंधक पद कार्रवाई की सूचना दी

Ibn24x7news विजय कुमार शर्मा प,च,बिहार
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज बेतिया के सिविल सर्जन कृष्ण कुमार राय ने स्वास्थ्य सचिव एवं जिला पदाधिकारी पश्चिम चंपारण को दवा खरीद घोटाले में शामिल लेखा प्रबंधक विनोद कुमार पर एंटीडी की दवा खरीद में घोटाला करने पर इसकी सूचना तथा कार्रवाई का लेखा जोखा स्वास्थ्य सचिव बिहार सरकार एवं जिला पदाधिकारी पश्चिम चंपारण को लिखित तौर पर दिया है इसमें इन्होंने का लिखा है कि 33.7 लाख की एंटी डी दवा खरीद मामले में जिला स्वास्थ्य समिति के लेखा प्रबंधक को विनोद कुमार ने बड़ी घपला बाजी की है। जबकि इस एनटीटी दवा की कोई आवश्यकता नहीं थी इसके बावजूद भी अपनी मनमानी करते हुए 33.7 लाख की दवा खरीद कर बिना अनुमति के पीएचसी एवं ए पीएचसी में भेज दिया है, इतना ही नहीं दवा आने के बाद भी इसकी जांच नहीं हुई और ना ही दवा आपूर्ति करने वाले कंपनी से इसकी पूर्ण रुप से कागज भी नहीं मिला। दवा खरीद घोटाले की में जिला समाज समिति के लेखा प्रबंधक विनोद कुमार ने दवा की एक्सपायरी डेट भी नहीं देखा और आपूर्ति करने का आदेश अपने तौर पर बिना पदाधिकारी के आदेश के मंगवा लिया, मंगाए गए एंटी डी दवा का एक्सपायरी डेट 1 साल ही रह गया था, इस एंटी डी दवा का ढाई हजार भाईल मंगाया गया था इस दवा को मनाने में आदेश पत्र पर जिला स्वास्थ्य समिति के लेखा प्रबंधक विनोद कुमार का हस्ताक्षर भी शार्ट में था जो ठीक नहीं था, अभी समय आदेश दिया गया था वह 30 / 3/14 खत्म होने के बाद सितंबर 2014 में दवा मंगाने का आर्डर दिया गया था जो मात्र 6 महीना बाकी था, इस की खरीदारी का चेक अप्रैल 2014 में काट कर दिया गया था उस समय के सिविल सर्जन अनिल कुमार सिंहा ने रिपोर्ट बनाई थी, दवा की आपूर्ति होने के बाद बगैर जांच किए दवा सभी की पीएचसी मे भेज दी गई जहां कोई इसका उपयोग करने वाला नहीं था। इस दवा का इस्तेमाल गंभीर बीमारियों में सुविधा संपन्न अस्पतालों में किया जाता है जहां प्रसव के मरीजों को जटिल प्रसव मैं इसका प्रयोग किया जाता है।
जिला स्वास्थ्य समिति के लेखा प्रबंधक को विनोद कुमार अपने आप में सिविल सर्जन से कम महत्व नहीं रखते थे अस्पताल में काम करने वाले सभी कर्मी इनसे भयभीत रहते थे और यह अपनी मनमानी कई विगत वर्षों से कर रहे थे मगर उच्च पदाधिकारी भी इनके पास नहीं फटकते थे इसी वजह कर यह अपने आप में विद्वान थे। ऐसी स्थिति में दवा खरीद घोटाले में संलिप्त जिला स्वास्थ्य समिति के लेखा प्रबंधक को जेल की सलाखों के पीछे रहना चाहिए और इनके द्वारा की गई अवैध कमाई के द्वारा करोड़ों रुपए के जायदाद को निगरानी विभाग के द्वारा जांच कराकर वस्तु स्थिति से निपटना होगा ताकि आने वाले दिनों में फिर ऐसा कोई कमी काम नहीं कर सके।

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