बेतिया: न्यायालय ने किया कमाल तेरे महीने में ही कर दिया धमाल

न्यायालय ने किया कमाल तेरे महीने में ही कर दिया धमाल
न्यायालय में तो मे न्याय मिलने की प्रक्रिया तो चलती ही रहती है और इसके अलावा न्यायालय में सदैव न्याय मिलने की अलावा कुछ नहीं मिलता है। कभी-कभी तो न्यायालय से न्याय मिलने में इतनी देर हो जाती है न्याय मांगने वाला भी तंग आकर भगवान से जा मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि न्याय में देरी होना न्याय से मुकर जाने के बराबर होता है। विगत कई वर्षों से सुनने को मिल रहा है कि बेतिया व्यवहार न्यायालय में कुछ मुकदमों की सुनवाई में बड़ी तेजी से घटनाक्रम के चलते न्याय सामने आ जा रहा है जिससे न्याय मांगने वालों की धैैय समाप्त नहीं हो पाती है ।
बेतिया व्यवहार न्यायालय में जिस तरह की एक घटना सामने आई है जिसमें न्यायाधीश ने माञ १३ महीने में ही एक हत्या के मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुना दिया है इसके अंतर्गत एक पिता ने अपने 7 वर्षीय मासूम बेटी को हत्या कर दी थी, जिला जज अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव ने पिता निर्गुण शाह को दोषी पाते हुए इस कांड के मुख्य अभियुक्त निर्गुण शाह को धारा 304 पार्ट 2 के अंतर्गत 8 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है इसके अलावा धारा 301 में 3 साल की और सजा मुकर्रर की है साथ ही ₹5000 का आर्थिक दंड भी लगाया है|
आर्थिक दंड नहीं देने के कारण इन्हें 6 माह की और सजा भुगतनी पड़ेगी अभियुक्त को दोनों सजा साथ साथ चलेगी। न्यायालय परिसर से जानकारी के अनुसार बीरबल साहनी अपनी 7 वर्षीय बेटी को कुदाल से काटकर हत्या कर दी थी जो एक बहुत बड़ा जघन्य अपराध माना गया है यह घटना 11 जून 2017 को घटी थी पुत्री की मां ने बताया है कि उसकी बेटी सुबह 7:00 बजे मेरे साथी तभी उसके पिता निर्गुण शाह ने गुस्से में आकर किसी काम के नहीं करने की वजह कर उसे कुदाल से गुस्से में काट दिया। माता अंजू देवी ने बताया कि उसके बेटी दीपा को उसके पिता निर्गुण शाह ने ही खेलने से मना करने पर बात नहीं मानने के कारण दरवाजे पर ही जाकर घर से कुदाल निकाल कर काट दिया |
जिससे उसकी उसकी लाश को ले जाकर पश्चिम खिलावे नदी के पार झाड़ी में ले जाकर छुपा दिया और वहां से फरार हो गया। मिसतिरी दीपा की मां ने बताया कि इसके पति निर्गुण शाह ने गुस्से में आकर खेल रही बच्ची को कुदाल से काट कर मृत घोषित कर दिया। ऐसी स्थिति में देखा जाए तो बेतिया व्यवहार न्यायालय ने जिस तेजी के साथ इस मुकदमे को सुनवाई करते हुए मात्र 13 महीने में ही फैसला सुना दिया जो इस न्यायालय के प्रक्रिया में एक आश्चर्यजनक घटना है।
 
रिपोर्ट विजय कुमार शर्मा ibn24x7news  बिहार

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