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मिर्जापुर – कांवड़ यात्रा के बदलते स्वरूप और चन्द्रग्रहण के दिन गुरु-पूर्णिमा पर विद्वत-समाज निर्णय दे

Ibn24x7news – रिपोर्ट विकास चन्द्र अग्रहरि ब्यूरो चीफ मीरजापुर
मीरजापुर । सावन माह में कांवड़-यात्रा का रूप-स्वरूप बदलता जा रहा है । इस बदलाव में विकृति अधिक आ रही है । इसको लेकर सनातन संस्कृति के नियामक विद्वत-समाज को आगे आना चाहिए ताकि अनजाने में कांवड़ यात्री दोषपूर्ण भक्ति कर रहे हैं, उस पर स्वेच्छया रोक लग सके ।
प्लास्टिक के लोटे का प्रयोग

प्लास्टिक के लोटे का प्रयोग कांवड़ में हो रहा है । जबकि धर्मग्रन्थों में प्लास्टिक का प्रयोग पूजनकार्य में गलत कहा गया है । इस पर पुजारी, पुरोहित, सन्त-महात्मा अपने भक्तों को प्लास्टिक प्रयोग से रोकें । इससे पर्यावरण को भी भारी क्षति पहुंच रही है ।
प्रकृति-संरक्षक हैं महादेव

जिनका अभिषेक होता है, वह महादेव प्रकृति संरक्षक है । उनके भक्त प्रकृति विनाशक बनकर पूजा करेंगे तो महादेव की कृपा मिलने की दूर दूर तक संभावना नहीं । पिछले दस-पांच साल से वे लोग जो किसी मनोकामना को लेकर कांवड़-यात्रा कर रहे हैं, वे खुद ही आत्मावलोकन कर समझ सकते हैं ।
घटिए प्लास्टिक का बनता है लोटा

पूरा कांवड़ ही घटिए प्लास्टिक से बनता है । कबाड़ से एकत्र प्लास्टिक से यह सब बनता है । इसको खुद भी धारण नहीं करना चाहिए लेकिन कम्पनियों के प्रचार से इसका उपयोग बढ़ता जा रहा है । पूरे दिन टी वी चैनलों में प्रवचन साधु संतों का हो रहा है लेकिन प्लास्टिक के कांवड़, लोटे पर कुछ नहीं कहा जा रहा है ।
रास्ते में गांजा, ताश खेलते नज़र आते हैं तमाम यात्री

लम्बी दूरी की यात्रा में तमाम यात्री गांजा पीते नज़र आते हैं । दलील देते हैं कि महादेव खुद यह सब पीते थे, उनका प्रसाद है । महादेव का अनुसरण करना है तो वे सबकुछ लुटा देते थे, लोकहित में वे सारा संकट खुद अपने ऊपर लेते थे, उसको भी अपनाना चाहिए ।
चन्द्रग्रहण के दिन पूर्णिमा

इस बार 27 जुलाई ’18 को रात्रि 11.54 से रात्रि 3.49 तक चन्द्रग्रहण है । चन्द्रग्रहण में 9 घण्टे पूर्व से मन्दिर के कपाट बंद हो जाते हैं । धर्म के अनुसार दिन में 2.54 के बाद धर्मनिष्ठ लोग खाना-पीना नहीं करते । ऐसी स्थिति में यदि इस दिन गुरुपूर्णिमा का आयोजन, भंडारा होता है तो वह शास्त्रीय विधि का उल्लंघन ही है । अतः उहापोह खत्म करने के लिए काशी विद्वत-परिषद और विंध्य विद्वत-परिषद का स्पष्ट निर्णय धर्मावलम्बियों के हित में होगा ।-सलिल पांडेय, संयोजक, डॉ भवदेव पांडेय शोध संस्थान मीरजापुर।

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