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मिर्जापुर: गर्मी की मार, किसान बेहाल

गर्मी की मार, किसान बेहाल
आसमान जुलाई के महीने में भी आग उगल रही है। तीखी घूप खेतों की ओर जाने से मना कर रही है। मिट्टी से धूल उड़ रही है।धान के बीज रोपण का कार्य अधूरा है। बोरिंग के सहारे समृद्ध किसान बीज की सिंचाई कर रहे हैं परन्तु कितने समृद्ध किसान अहरौरा के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में है, बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि जहाँ सिंचाई के लिए किसान इंद्र देव की आराधना करते हो, वहाँ की स्थिति चिंताजनक है। मौसम विभाग के सारे आंकड़े अब तक किसानों के अनुकूल नहीं है।
धरती के भीतर गर्मियों में पानी की सतह नीचे चली गई थी जो अभी तक ज्यों का त्यों है। वारिद का हवाओं से तालमेल बिगड़ा है और आसमान घनघोर घटाओं को कहां उड़ा ले जा रही है, पता नहीं चला है। किसानों के भीतर सूखे की आशंका सताने लगी है।पूर्ण रुपेण ईश्वर सिंचाई आश्रित ग्राम बरही, सगहा, तलरा, अमवां, भक्सी, खोरिया, सुकृत आदि सैकड़ों गांव के किसान परेशान हैं। बोरिंग का पानी भी नीचे चला गया है जिससे कारण खेतों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
अहरौरा के आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई का एक मुख्य साधन अहरौरा बांध है जिसमें एक हल्की दरार है जिससे पानी हमेशा निकलता दिखाई देता है।यह पहला कारण था और दूसरा बांध में मछली पालन होता है जो मछली मारने के लिए पानी निकासी होता है। बांध की गहराई भी कम होने से मानक सतह कम पानी में ही बांध का छू जाता है। बांध का पानी अधिकांश :कच्ची नहरों से किया जाता है जिससे अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचता। इस पर भी सरकार और उसके नुमाइंदे गंभीर नहीं हुए हैं। परिणामस्वरूप कृत्रिम सिंचाई व्यवस्था के अभाव हजारों एकड़ भूमि असमय बारिश के कारण असिंचित रह जाती है और जो किसान भगवान् भरोसे है वो आज भी शहरी पलायनवादी नीति के पोषक हैं।
आर्थिक विकास में किसान महत्वपूर्ण ईकाई होते हुए भी सरकारी खामियों के शिकार हैं, इस पर आज गंभीर होने की आवश्यकता है। इस क्षेत्र के किसानों की माली हालत इससे लगा सकते हैं कि अधिकांश किसानों की प्रस्थिति राशन कार्डों, आय प्रमाण पत्रों में मजदूर के रूप में अंकित है।
आखिर कब होगा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सपना साकार जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान? क्योंकि आज प्रकृति और सरकारी दोनों कृपा पात्र नहीं बन पायें है इन क्षेत्रों के किसान।
 
हरिकिशन अग्रहरि

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