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बहराइच: अत्याचार बढ़ने पर प्रभु अवतार लेते हैं:श्री सिद्धनाथ पीठाधिस्वर

अत्याचार बढ़ने पर प्रभु अवतार लेते हैं:श्री सिद्धनाथ पीठाधिस्वर
बहराइच। जिले के वरिष्ठ महामण्डलेश्वर स्वामी रवि गिरी जी महाराज सिद्धनाथ पीठाधिस्वर द्वारा पित्रों की मुक्ति हेतु चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा एवं उत्साह पूर्वक मनाया गया। भागवत कथा से भक्त में सदगुणों का विकास होता है, वह काम, क्रोध, लोभ, भय से मुक्त होता है। यह बात कथा व्यास वरिष्ठ महामण्डलेश्वर स्वामी रवि गिरी जी ने कथा के दौरान दिए। कथा का आयोजन श्री सिद्धनाथ मन्दिर में किया जा रहा है।
कथा के चौथे दिन उन्होंने कहा कि समुद्र मंथन से तो एक बार में केवल चौदह रत्न मिले थे पर आत्ममंथन से तो मनुष्य को परमात्मा की प्राप्ति होती है। जो हरि का दास है वह सुख दुख से परे होकर हमेशा परमानंद की स्थिति में रहता है। उन्होंने प्रह्लाद और मीरा का उदाहरण देते हुए भक्त की महानता का वर्णन किया। विभिन्न क्षैत्र से पहुंचे श्रद्धालु भाव विभोर हो झूमने व नाचने लगे। स्वामी रवि गिरी जी ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए धर्म,अर्थ,काम व मोक्ष की महता पर प्रकाश डाला। उन्होने बताया कि 84 लाख योनियां भुगतने के पश्चात मानव देह की प्राप्ति होती है । इसलिए इस देह को उपयोग व्यर्थ कामों मे ना करके जनकल्याण व ईश्वर भक्ति में समर्पित कर दे। इस मौके पर भगवान श्री कृष्ण की जीवंत झाकियां सजाई गई, जिसे देखकर श्रद्धालु अभिभूत हो उठे। जब-जब अत्याचार और अन्याय बढ़ता है तब-तब प्रभु का अवतार होता है। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। जब कंस ने सभी मर्यादाएं तोड़ दी तो प्रभु श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। यहां पर जैसे ही श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग कथा में आया तो श्रद्धालु हरे राधा-कृष्ण के उदघोष के साथ नृत्य करने लगे। कथा व्यास स्वामी श्री रवि गिरी ने कहा कि भारतीय संस्कृति और धर्म का विश्वकोष है श्रीमद्भागवत।
उन्होंने कहा कि जीव को जगदीश में समाहित करने के लिए भागवत का श्रवण जरूरी है। श्रीमद्भागवत भवसागर से जीव को तारकर श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप का दर्शन कराती है। भागवत को आत्मसात करने से ही भारतीय संस्कृति की रक्षा हो सकती है। वसुधैव कुटुंबकम् की परिकल्पना भागवत को आत्मसात करने से ही साकार की जा सकती है। निष्काम कर्म, ज्ञान- साधना, सिद्धि, भक्ति, अनुग्रह, मर्यादा, निर्गुण- सगुण तथा व्यक्त- अव्यक्त रहस्यों से श्रीमद्भागवत जीव का परिचय कराती है। उन्होंने सच्चे संत के लक्षणों से भी श्रद्धालुओं को अवगत कराते हुए कहा कि जिसकी शरण में जाने से शांति और सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है वही सच्चा संत है। गुरु के चरण चिन्ह दहलीज पर लेना चाहिए, इससे सद्गुणों के साथ- साथ लक्ष्मी का आगमन होता है। भगवान को कहीं खोजने की जरूरत नहीं, वह हम सब के हृदय में मौजूद हैं। अगर जरूरत है तो सिर्फ महसूस करने की और जिस दिन हमारा मन भगवान की सच्ची भक्ति में लग जाएगा उसी दिन से हमें भगवान की उपस्थिति महसूस होने लगेगी। भागवत कथा को मन, कर्म और वचन से श्रवण करना उसी सच्ची भक्ति का सबसे बड़ा मार्ग है।
स्वामी रवि गिरी जी ने श्रीकृष्ण अवतार की व्याख्या करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का अवतार तब होगा जब आप सत्य निवेशी बनेंगे। अर्थात आपको सत्य की साधना करनी पड़ेगी। मां देवकी ने सत्य की साधना की। सत्य की साधना कष्टदायी हो सकती है, लेकिन इसके फल के रूप में हमें श्रीकृष्ण ही प्राप्त होंगे।
वह हमारे जीवन को आनंद से भर देंगे। भगवान कृष्ण सभी समस्याओं का समाधान हैं। उनके मार्गदर्शन में जीवन अगर चलने लगा तो जीवन का हर मार्ग आनंद से भर जाएगा। प्रभु कृष्ण भक्तों के प्रार्थना रूपी निर्मल झील में प्रतिदिन स्नान करते हैं।
वरिस्ठ महामंडलेश्वर स्वामी रवि गिरी जी महाराज ने प्रार्थना की विधि बताते हुए कहा कि प्रार्थना में भाषा  की प्रधानता नहीं होती है। प्रार्थना तो भाषा शून्य होती है, लेकिन इसके लिए भाव जरूरी है। कथा में नगरीय क्षेत्र व शहरी क्षेत्र से पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस मौके आयोजित हरिनाम संकीर्तन में श्रद्धालु झूम उठे।
स्वामी रवि गिरी जी ने कथा की मीमांसा करते हुए कहा कि नंदोत्सव अर्थात श्री कृष्ण जन्म से पहले नवम स्कंध के अंतर्गत राम कथा सुनायी और कहा कि भागवत में श्रीकृष्ण जन्म से पहले राम कथा की चर्चा इसी कारण कही गई है। उन्होंने कहा कि जब तक हमारा जीवन प्रभु श्रीराम की तरह नही रहेगा तब तक श्री कृष्ण कथा हमे समझ नही आयेगी।वरिष्ठ महामंडलेस्वर स्वामी रवि गिरी जी ने कहा कि भागवत कथा एक एैसी कथा है जिसे सुनने ग्रहण करने से मन को शांति मिलती है अपने शरीर में भरी मैल को साफ करने के लिए अगर इसे मन से ग्रहण करें तो यह अमृत के समान है इसमें अपने अंदर का मैं, अहंकार खत्म करना चाहिए।व्यास जी ने कहा कि मानव का सबसे बड़ा दुश्मन हमारे अंदर बैठा अहंकार है श्रीमद् भावगत कथा अपने मन में बँठा “मैं” और अहंकार को खत्म करने का उचित दर्शन है।
कथा के दौरान यजमान प्राचार्य सुशील चन्द्र तिवारी, श्रीमती ममता तिवारी दिनेश गुप्ता, श्री मती सुमन गुप्ता पुष्पा मिश्रा, ,मनोज गुप्ता, अदित्य भान सिंह, आनंद गुप्ता, विपिन विश्वकर्मा, राज कमल, अनुराग गुप्ता, मनोज जायसवाल, विद्या अग्रवाल, विजय गुप्ता, मोनू सोनी, मनीष मित्तल तथा गुरु परिवार के सभी सदस्य राधारमन यज्ञसेनी ,श्रीमती मंजू यज्ञसेनी, अंशुमान यज्ञसेनी,गद्दी सेवक ह्रदेश पांडेय, भजनानंदी के0 के0 सक्सेना, श्रीमती माला सक्सेना, विजय कुमार,राजू,मुक्ति नाथ, उमाकांत गोस्वामी, रिंकू द्विवेदी, पंकज , सुशील ,रवि कुमार,व पूज्य गुरु परिवार के सदस्यों सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने भागवत कथा का रसपान किया।
 
रिपोर्ट अनूप मिश्रा ibn24x7news बहराइच

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