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आखिर एक किताब में कैसे बदली ओबामा की तकदीर

 

साल 2020 आपको अपार संभावनाओं आकांक्षाओं को उंमग उत्साह उल्लास उम्मीद और प्यार से भर दे।

बराक हुसैन ओबामा अमेरिका के 44 वां अश्वेत राष्ट्रपति रहे उनके संघर्षों के बारे में आज जानने का प्रयास करते हैं, कि कैसे उन्होंने जिंदगी के हर एक मोड़ पर लड़ाई जारी रखी।
बराक ओबामा का जन्म 4 अगस्त 1961 को हुआ जब ओबामा 2 साल के थे तब उनके मां बाप के बीच झगड़ा हुआ और वह अलग हो गए अलग होने के बाद उनके पिता हार्वर्ड जाकर पीएचडी की डिग्री लेने चले गए। उसके बाद वह अपने वतन केन्या लौट गए।

2 साल के ओबामा एकांत में अपने पिता की तस्वीर बनाते थे और उनकी कहानियों को अपनी मां और नानी के द्वारा सुनते हुए थे।
ओबामा ने अपने पिता को 1971 में 10 वर्ष की उम्र में हवाई नामक शहर में आखिरी बार देखा था।

उसके बाद उनके पिता की 1983 में कार एक्सीडेंट में मौत हो गई उसके बाद ओबामा अपने पिता से नहीं मिल पाए । क्योंकि ओबामा को भरोसा था कि उनकी उम्मीदों पर उन्हें पता था कि उम्मीदे घायल जरूर करती हैं, लेकिन घायल आखिर मरता कहां है वह कुछ अलग करने की उम्मीद पर ही जिंदा रहता हैं|

अच्छी और उपलब्ध बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए उनका दाखिला कक्षा 5 में पुनाहो स्कूल में कराया गया, और वे पाचंवी से लेकर बारहवी तक विद्याध्ययन वही किये।
ओबामा 12 के बाद los angeles आए और Occidental College मे चले जाते है,

संघर्ष और ठोकरे खाने का दौर जारी रहता है, 1983 में जिस समय पूरा विश्व क्रिकेट विश्व् कप 1983 देख रहा होता है उस समय ओबामा COMUNITY ORGANISER का काम करते हैं ।
और इसी वक्त 1985 में अपने जीवन पर आधारित किताब DREAMS FROM MY FATHER : A STORY OF RACE AND INHERITANCE लिखते हैं ।

बाद में वे वही से लाँ करते हैं, जहाँ से उनके पिता ने पीएचडी किया था हार्वर्ड लाँ स्कूल से, 1988 में वे हार्वर्ड लाँ रिव्यू के पहले अश्वेत अध्यक्ष बनते हैं।

1985 में लिखे किताब का प्रभाव लोगों पर पडना शुरू हो चुका था, इसको ओबामा शायद भाँप चुके थे।
1992-2004 के बीच इलनोइक के 13 वे जनपद को तीन बार प्रतिनिधित्व कर चुके होते हैं।

धीरे धीरे अपना कद ओबामा डैमोक्रेटिक पार्टी में बढाने लगते है, साल 2004 ओबामा की मेहनत का फल के स्वरुप में सैलाब बनकर आया, जिसमे उन्होंने पहली बार अमेरिकी संसद (सेनेट) में इंट्री ली।
अमेरिका में किसी सेनेट का चुनाव दो चरण में होता है ,पहले PRIMARY बाद में GENERAL पहले दोनो पार्टीयो डैमोक्रेटिक और रिपब्लिक के उम्मीदवार अपने ही पार्टी के बाकी उम्मीदवारो में से अव्वल आते हैं, फिर उन्हें जनरल इलेक्शन जीतना पडता हैं।

2004 का इलिनोइस का चुनाव डैमोक्रेटिक प्राइमरी में बराक ओबामा जीते, और रिपब्लिकन से उद्योगपति जैक रयान जीते लेकिन अपनी ही पत्नी के खिलाफ घरेलू हिंसा का आरोप से बरी ना होने के कारण जैक रयान को अपना नाम वापिस लेना पडा।

इसके बाद पुरे संयुक्त राष्ट्र की नजर ओबामा पर थी, हड्बडी में रिपब्लिकन पार्टी के पूर्व राजनीतिक डिप्लोमैट एलान कैश को जैक रयान के जगह पर उम्मीदवार बनाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी,
ओबामा का चुनाव जीतना की महज औपचारिकता ही भर बची थी, लेकिन आम चुनाव के नतीजे ने ओबामा को 2004 में इलिनोइश से 70 प्रतिशत मत मिले, वही उनके प्रतिद्वंदी को 27 प्रतिशत।

इस प्रचंड जीत ने अमरिकी सत्ता के गलियारो से ओबामा को फ्यूचर प्रेजिडेंट का नारा दिया जाने लगा, और आखिर में उस किताब ने ओबामा की कहानी को सुखद अंत देकर, उन्हे और उनके संघर्षो को एक तोहफा दिया, जिसका नाम था अमरिका का राष्ट्रपति पद।

 

रिपोर्ट प्रभात शंकर IBN24X7NEWS

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