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दीपोत्सव पर सीएम योगी की नजर, 492 साल बाद अयोध्या की जमीन पर साकार होगा

मंदिर आंदोलन में अग्रणी रही गोरक्षपीठ की भूमिका

IBN NEWS अयोध्या ब्यूरो चीफ सत्यम सिंह

अयोध्या भगवान राम की नगरी अयोध्या में दीपावली इस बार और भी विशिष्ट होने वाली है। करीब 492 साल बाद यह पहला मौका होगा, जब श्रीरामजन्मभूमि पर भी ‘खुशियों’ के दीप जलेंगे। कतिपय प्रतिबंधों के चलते अभी पिछले वर्ष तक यह संभव नहीं हो पाया था। इसी तरह श्रीरामजन्मभूमि पर बहुप्रतीक्षित मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद होने वाले पहले दीपोत्सव को लेकर भी लोगों में जबरदस्त उत्साह है। योगी सरकार का अयोध्या में यह चौथा दीपोत्सव है।
दीपावली की पूर्व संध्या पर होने वाले दीपोत्सव-2020 में इस बार पिछला रिकार्ड तोड़ने की योजना है। कोविड-19 के प्रोटोकाल का पूर्ण पालन करते हुए राम की पैड़ी पर इस बार 5.51 लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दीपोत्सव के दिन श्रीरामजन्मभूमि पहुंचकर रामलला का दर्शन करने के बाद दीप प्रज्ज्वलित करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी वर्चुअल माध्यम से दीपोत्सव से जुड़ेंगे।

दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन प्रयागराज कुंभ की भव्यता-दिव्यता और स्वच्छता के लिए वैश्विक पटल पर सराहना पा चुके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दीपोत्सव को वैश्विक आयोजन बनाने में पूरी शिद्दत से जुटे हैं। आगामी 11 से 13 नवंबर तक आयोजित होने वाले दीपोत्सव की एक-एक तैयारी पर सीएम की नजर है। वह सभी प्रस्तावित कार्यक्रमों का प्रस्तुतीकरण भी देख चुके हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर पहली बार वर्चुअल माध्यम से भी दीप प्रज्ज्वलित करने की व्यवस्था की गई है। कोविड-19 के कारण जो लोग अयोध्या नहीं पहुंच पाएंगे, वह श्रीरामजन्मभूमि पर वर्चुअल माध्यम से दीप प्रज्ज्वलित कर सकेंगे। दीपोत्सव पर अयोध्या की भव्य सजावट की जाएगी। श्रीरामजन्मभूमि, कनक भवन, राम की पैड़ी व हनुमान गढ़ी सहित सभी मंदिरों में बिजली की सजावट की जाएगी। इसी प्रकार पुलों व विद्युत पोलों आदि पर भी बिजली की झालर लगाई जाएगी। दीपोत्सव के अवसर पर सरयू जी की भव्य आरती की व्यवस्था भी की जा रही है ।

आजादी के पहले से लेकर अब तक मंदिर आंदोलन में गोरक्षपीठ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मसलन वर्ष 1949 में जब विवादित ढांचे के भीतर रामलला का प्रकटीकरण हुआ तो पीठ के तत्कालीन पीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ कुछ साधु-संतों के साथ वहां संकीर्तन कर रहे थे। बाद में उनके शिष्य ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ वर्ष 1984 में गठित श्रीरामजन्म भूमि मुक्ति यज्ञ समिति के आजीवन अध्यक्ष रहे। महंत अवेद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने पर बतौर पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने भी इस जिम्मेदारी को बखूबी संभाला। अपने गुरु के सपनों को उन्होंने अपना बना लिया। पीठ के उत्तराधिकारी, फिर सांसद और अब मुख्यमंत्री के रूप में वह इन सपनों को साकार करने में जुटे हैं।

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