डॉ राधा नरूला को कांग्रेसियों ने नम आंखों से दी श्रद्धांजलि

 

रिपोर्ट बी. आर. मुराद IBN NEWS फरीदाबाद,हरियाणा

फरीदाबाद:कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री, समाजसेवी एवं शिक्षाविद डॉ. राधा नरूला को जिला कांग्रेस के सभी कार्यकर्ताओं ने तिरंगा ओढाकर नम आंखों से श्रद्धांजलि दी | मेहनत,ईमानदारी और संघर्ष की प्रतिमूर्ति डॉ.राधा नरूला के पार्थिव शरीर को एनएच-4 के स्वर्ग आश्रम में सिख धर्म के नियमों अनुसार पंचतत्व में विलीन किया गया | उनको अंतिम विदाई देने के लिए शहर के सभी गणमान्य लोग पहुंचे | डॉ.नरूला की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से आज सुबह 6:30 पर अचानक हो गई थी |

वह अपने पीछे एक पुत्र,बहु,पोते-पोती और परिवार जैसा स्कूल का स्टाफ छोड गई हैं | उनको अंतिम विदाई देने वालों में जोगेन्द्र चावला,गुलशन भाटिया,मानक चंद भाटिया,मंहत कैलाश नाथ,महेन्द्र नागपाल, कंवल खत्री,मोहन लाल अरोडा, सुभाष नौनिहाल,कांग्रेसी नेता गुलशन बग्गा,बलजीत कौशिक, ज्ञानचंद अहुजा,सुमित गौड, योगेश ढींगडा,मोहम्मद आफताब खान,संजय सोलंकी,डॉ.शौरभ शर्मा,बिलाल अहमद,नगेन्द्र भडाना,धर्मवीर भडाना,राकेश भडाना,गौरव ढींगडा,अशोक रावल सहित सैकडों लोग मौजूद थे | हरियाणा की राजनीति में डॉ. राधा नरूला एक जाना माना नाम है | आजादी के अन्य मतवालों की तरह युवा राधा भी अपनी जवानी में ही कांग्रेस की सिपाही बन गई थीं | उन्होने युवा काल से ही कांग्रेस में सक्रीय कार्यकर्ता के तौर पर काम किया था | जीवन के लम्बे सफर में उन्होंने अनेक बार फरीदाबाद की राजनीति में कांग्रेस के उम्मीदवारों को विजयी बनाने के लिए बडा महत्वपूर्ण काम किया |

स्वर्गीय डॉ.नरूला का जन्म 1952 में हुआ था। राजनीति के साथ-साथ उनकी पहचान एक शिक्षक के रूप भी थी | उन्होने उस समय में इंग्लिश में एमए किया हुआ था | जिस समय बेटियां शिक्षा के विषय में सोच भी नहीं पाती थी,और समाज में भी बेटियों को पढ़ाने का प्रचलन कम था | अपने बचपन से ही संघर्षशील,जुझारू और मेहनतकश रही डॉ. राधा नरूला ने अथक प्रयासों के बाद अपना रूतबा बनाया था | एक बार उन्होंने बताया था कि उनका जन्म बेहद गरीब परिवार में हुआ था | आज के पाकिस्तान से उस समय जो हजारों परिवार उजडकर फरीदाबाद आए थे | उनमें एक परिवार उनका भी था | उन सभी परिवारों के लिए यहां जीवन बहुत कष्टदायक था | शहर में फैक्ट्रियां लगनी शुरू हुईं थी और स्कूल तो दूर दर तक नहीं थे | ऐसे भयानक हालातों के बावजूद शुरू से ही उनका सपना शिक्षक,और राजनेता बनने का था | इसलिए उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ उस समय के एक स्कूल में पढ़ाना भी शुरू किया था | उन्होंने बहुत मेहनत के बाद शांति निकेतन पब्लिक स्कूल की स्थापना की,जो आज शहर के प्रसिद्ध स्कूलों में शुमार है | उनके स्कूल में पढ़कर अनेक बच्चे आज बेहतरीन जीवन जी रहे हैं | उनके लिए और हम सबके लिए वह हमेशा हमारी यादों में जीवित रहेंगी |

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