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मिड-डे-मील अब प्रेरणा एप पर होगा दर्ज

 

बरेली। कक्षा 8 तक के बच्चों के लिए संचालित की जा रही मध्याह्न भोजन व्यवस्था में बदलाव किया गया है। 5 सितंबर से लागू किए गए प्रेरणा एप को एमडीएम के लिए क्रियान्वित किया गया है। प्रेरणा तकनीकी फ्रेमवर्क में अब प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापकों को सूचना देनी होगी। पूर्व की व्यवस्था को समाप्त करने के आदेश के साथ नए क्रियान्वयन के लिए डीएम ने आदेश जारी किए हैं। 19 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक की सूचना के आधार पर ही खाद्यान्न और कन्वर्जन कास्ट दिया जाएगा।
डीएम ने सभी प्रधानाध्यापकों को शासन के नए नियम के तहत सूचनाएं देने के लिए आदेश दिया है। प्रेरणा एप के अंतर्गत एमपीआर बाक्स में सारी सूचनाएं ही शामिल होंगी। अभी तक मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के कॉल सेंटर से बच्चों के भोजन करने की संख्या मांगी जाती रही है जिसमें विराम लगा दिया गया है। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर प्रेरणा एप की व्यवस्था लागू कर दी गई है। जिसमें 7 विभिन्न सूचनाएं भेजने का आदेश बेसिक शिक्षा के प्रधानाध्यापक और प्रधानाध्यापिकाओं को दिया गया है। इन्हीं सूचनाओं में एमडीएम को भी शामिल किया गया है।

परियोजना निदेशक विजय किरण आनंद ने एमडीएम की सूचना प्रेरणा तकनीकी फ्रेमवर्क के क्रियान्वयन के लिए डीएम को पत्र भेजा है। डीएम ने इसके क्रियान्वयन के लिए आदेश दिया है। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को दिए जाने वाले एमडीएम की सालों साल पुरानी घिसी पिटी व्यवस्था को हाईटेक कर दिया गया है।

प्रेरणा एप के जरिए सूचनाओं के आदान प्रदान की व्यवस्था लागू कर दी गई है। विद्यालयों के मुखिया को एमडीएम से जुड़ी दैनिक और त्रैमासिक मांग पत्र जैसी तमाम सूचनाएं भेजनी होंगी। एप का उपयोग न होने पर खाद्यान्न और कन्वर्जन कास्ट नहीं मिल पाएगा। मध्यान्ह भोजन मॉड्यूल के अंतर्गत प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापकों को खाद्यान्न और कन्वर्जन कास्ट तथा भोजन करने वाले बच्चों की संख्या सूचना भेजनी है।

इसके साथ ही त्रैमासिक रिपोर्ट में संभावित बच्चों की संख्या के आधार पर खाद्यान्न और कन्वर्जन कास्ट दर्ज किया जाएगा। इसी के आधार पर तीन माह का खाद्यान्न और कन्वर्जन कास्ट शासन से मिल सकेगा। जो स्कूल इस सूचना को नहीं भेजेगा, उसे इसका लाभ नहीं दिया जाएगा और आने वाले समय में संबंधित विद्यालय कार्रवाई की जद में होगी।
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यह थी पुरानी व्यवस्था

राजकीय और सवित्त के कक्षा 8 तक के बच्चों के साथ सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों और मदरसों में संचालित हो रहे एमडीएम को लेकर अभी तक प्रधानाध्यापक कागज में यह सूचनाएं तैयार करते थे। जिन्हें न्याय पंचायत समन्वयवक के पास जमा करते थे। न्याय पंचायत स्तर पर रिपोर्ट कंपाइल होकर सह ब्लाक समन्वयक के पास कंपाइल भेजी जाती थी। ब्लाक स्तर पर खंड शिक्षाधिकारी इन सभी रिपोर्ट को कंपाइल करके बीएसए दफ्तर भेजा करते थे। परीक्षण और जांच के बाद शासन को भेजा जाता था और बीएसए दफ्तर को मिलने वाली धनराशि और खाद्यान्न को संबंधित विद्यालय भेजा जाता रहा है।

 

रिपोर्ट कपिल ibn24x7news बरेली

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