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अब बहुरने वाले हैं जिले में स्थित वेटलैंड के दिन, बलरामपुर पहुच वेटलैंड कमेटी भारत सरकार के सदस्य ने किया वेटलैंड का निरीक्षण

 

रिपोर्ट राम सागर तिवारी IBN NEWS बलरामपुर

वेटलैंड क्षेत्र को संरक्षित किए जाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की है आवश्यकता, वेटलैंड क्षेत्र की पारिस्थितिक तंत्र में है महत्वपूर्ण भूमिका

प्रधानमन्त्री ने देश में दो सौ वेटलैंड संरक्षित करने का दिया है निर्देश
बलरामपुर। देश में दो सौ वेटलैंड संरक्षित करने के लिए भारत सरकार का लक्ष्य है। जिसके तहत 26 मार्च को वेटलैंड कमेटी भारत सरकार के सदस्य अफरोज अहमद द्वारा जनपद बलरामपुर के भ्रमण के दौरान वेटलैंड क्षेत्र देखा गया। वेटलैंड कमेटी के सदस्य द्वारा बूढ़ी राप्ती वेटलैंड क्षेत्र, सीरिया नाला वेटलैंड क्षेत्र को देखा गया,

इस दौरान माननीय सदस्य द्वारा वेटलैंड क्षेत्र पर अवैध अतिक्रमण को दूर किए जाने, वेटलैंड क्षेत्र में वृक्षारोपण किए जाने, वेटलैंड क्षेत्र को स्थानीय लोगों को इसकी महत्वा बताए जाने तथा इसको उनकी संस्कृति से जोडे जाने की बात कही गई। इस दौरान माननीय सदस्य ने बताया कि इसके पीछे उनका उद्देश्य है कि जिले के जलीय एवं जंगली क्षेत्रों के संरक्षण के लिए उसकी कार्य योजना तैयार कर भारत सरकार को सौंपी जाए। जिससे कि जिले के वेटलैंड को संरक्षित किया जा सके।

 

इसके लिए श्री अफरोज अहमद द्वारा जिलाधिकारी श्रीमती श्रुति के साथ एक बैठक कर जिले के वेटलैंड से सम्बन्धित ऐतिहासिक एवं भौगोलिक जानकारियां मांगी गई तथा वेटलैंडस को संरक्षित किए जाने के संबंध में चर्चा की गई। इस दौरान वेटलैंड कमेटी भारत सरकार के सदस्य ने कहा कि आज दुनिया में जिस तेजी से विकास हो रहा है, उसी तेजी से पर्यावरण का हनन भी हो रहा है। आधुनिक विकास ने सबसे ज्यादा नुकसान हमारे वातावरण और आद्र्रभूमियों को पहुंचाया है। कारखानों से निकलने वाले गंदे अवशिष्ट, खनन और भूमिगत जल के अत्याधिक दोहन आदि ने आद्र्रभूमि को अत्यधिक नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि वेटलैंड जल को प्रदूषण से मुक्त बनाती है। भारत में ग्यारह लाख बारह हजार एक सौ इक्तीस हेक्टेयर क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय महत्व के वेटलैंड्स की रामसर सूची में शामिल किया गया है।

हालाकि श्रावस्ती का कोई भी वेटलैंड इस सूची में शामिल नहीं है। मगर श्रावस्ती में कई ऐसे वेटलैंड हैं जिनको रामसर सूची में शामिल कराने के लिए प्रयास किया जा सकता है। साथ हीं श्रावस्ती में कई ऐसे भी वेटलैंड हैं जिनके संरक्षण मात्र से हीं जलवायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है। वेटलैंड की विशेषता के बारे में बताते हुए श्री अफरोज ने कहा कि आद्र्रभूमि में उच्च जैव विविधता पाई जाती है तथा इसमें पारिस्थिति की उत्पादकता भी अधिक होती है। जो तटीय चक्रवात, सुनामी, बाढ़ और सूखे के खतरे को कम करती है। इससे भूमिगत जल के स्तर को बनाए रखने में मदद मिलती है और ये प्रवासी पक्षियों के आकर्षण का केन्द्र भी होता है।

 

जैविक रूप से विविध पारिस्थितिक तंत्र जो कई प्रजातियों के लिए आवास प्रदान करना, तूफान और बाढ़ के खिलाफ तट पर बफर्स के रूप में सेवा करना और हानिकारक प्रदूषकों को बदलकर स्वाभाविक रूप से पानी को फिल्टर अर्थात जल को प्रदूषण से मुक्त करता है। वेटलैंड्स जंतु ही नहीं बल्कि पादपों की दृष्टि से भी एक समृद्ध तंत्र है, जहां उपयोगी वनस्पतियां एवं औषधीय पौधे भी प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। ये उपयोगी वनस्पतियों एवं औषधीय पौधों के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए बलरामपुर में स्थित वेटलैंड को संरक्षित कर जलवायु को प्रदूषण मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है

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