विश्वविद्यालय द्वारा भ्रष्टाचार में लिप्तता पाये जाने पर कठोर कार्यवाही-कुलपति

 

रिपोर्ट  अंकुर त्रिपाठी  ब्यूरो IBN NEWS इटावा

 

सैफई/इटावा:चिकित्सा विश्व विद्यालय सैफई के कुलपति प्रो. (डा.)राजकुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा भ्रष्टाचार में लिप्त पाये जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कठोर कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से मैसेज तथा आडियो क्लिप वायरल की जा रही है जो निंदनीय है।उन्होंने कहा कि यदि किसी भी विश्वविद्यालय कर्मी के खिलाफ किसी भी स्तर पर यदि भ्रष्टाचार में लिप्तता का कोई भी सबूत मिलता है,

तो उसके खिलाफ विधिक कार्यवाही किया जायेगा।गलत शिकायतों के सम्बन्ध में उन्होंने बताया कि कई बार कुछ लोगों द्वारा अज्ञात स्रोत से गलत नाम तथा मोबाइल नम्बर लिखकर भी विश्वविद्यालय के कुछ ईमानदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत किया जाता है।जब इस सम्बन्ध में जाॅच करायी जाती हैै तब नाम तथा पता फर्जी निकलता है तथा ऐसे अज्ञात नाम तथा पता वाले पत्रों तथा ईमेल पर कार्यवाही असम्भव है।विश्वविद्यालय में काफी वर्षों से कुछ भ्रष्ट अधिकारियों,माफिया तथा विश्वविद्यालय विरोधी कुछ पत्रकारों से गठजोड़ चलता आ रहा है,तथा ये नकारात्मक तत्व विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों से फोन कर उनकी बात रिकार्ड कर उन्हें ब्लैक मेल करते हैं।

इसके अलावा पूर्व में कुछ पदों पर भी जरूरी योग्यता न रखने वाले कुछ कर्मचारियों तथा हेल्थ केयर वर्कर्स की नियुक्ति हुई है,जो अपने कार्य को ठीक से निष्पादित नहीं करते जिससे मरीजों के केयर में भी बाधा आ रही है।कुलपति डा. राजकुमार ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय में वर्षों से भ्रष्टाचार अपनी जड़ें जमा चुका है जिसको उन्होंने अपने कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही कन्ट्रोल करने की कोशिश शुरू कर दी जिस पर उन्हें अज्ञात स्रोतों से बार-बार जान से मारने की धमकी भी दी जाती रही है।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुरेश चन्द्र शर्मा ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान ऐसा देखने में आया है कि कुछ हेल्थ केयर वर्कर्स बिना विश्वविद्यालय प्रशासन से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिये अन्य जगहों पर आवेदन करते हैं जो सरकारी नियमानुसार दण्डनीय है।इसके अलावा ऐसे हेल्थ केयर वर्कर्स बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र लिये अन्य संस्थानों की लिखित एवं साक्षात्कार परीक्षा में भी सम्मिलित हो रहे हैं।अन्तिम चयन के पश्चात् अनापत्ति प्रमाण-पत्र तथा रिलिविंग पाने के लिए इनके द्वारा विश्वविद्यालय के कुलपति तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर फोन तथा अन्य स्रोतों जिनमें राजनैतिक व्यक्तियों से गलत तरीके से दबाव बनाने की कोशिश की जाती है।

इसके बाद भी यदि विश्वविद्यालय द्वारा नियमों के तहत मनाही की जाती है तो कुछ हेल्थ केयर वर्कर्स आत्मदाह की धमकी देते हैं।ऐसे मामलों को विश्वविद्यालय के कुलपति ने गंभीरता से लिया है तथा यह निर्देश दिया है कि यदि कोई भी हेल्थ केयर वर्कर्स तथा कर्मचारियों इस तरह से विश्व विद्यालय को भयादोहन कर गलत तरीके से अनापत्ति प्रमाण-पत्र तथा रिलिविंग पाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ विधिक तथा अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी।

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