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छत्तीसगढ़: सबसे बड़ा जमीन घोटाला महासमुंद में, कांग्रेस के एक्शन से भ्रष्ट्राचारियों की नींद हुई गायब

छत्तीसगढ़- हमने पहले ही बताया था, कि चौथी बार सरकार बनाने का दावा कर रही भाजपा सरकार के लिए चुनौती भरा है। और हुआ भी यही प्रदेश में सबसे बड़े जमीन घोटाले महासमुंद जिले में हुआ है। भाजपा शासन काल में जमीन भ्रष्ट्राचार बेलगाम हुआ, जिसे अब कांग्रेस परत-परत दर खोलने की तैयारी में जुट गया है। कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सत्ता में आते ही आदिवासियों को उनके जमीन वापस दिलाने का वादा भी कर चुके हैं। लोगों को उम्मीद है, कि ऐसे भ्रष्ट्राचारी अब जेल के सलाखे के पीछे होंगे।

मामले को लेकर 15 साल से भाजपा पार्टी के विपक्ष में बैठे रहे कांग्रेस पार्टी हर बार विधानसभा पटल में जांच और कार्रवाई की मांग की, लेकिन भाजपा ने इसे नजरअंदाज कर दिया था। इस गिरोह में पूर्व प्रदेश के एक मंत्री भी शामिल हैं, जिनका महासमुंद जिले में जमीन घोटाले को लेकर चर्चा में आए थे।

ऐसे गड़बड़ी को दिया गया अंजाम
शासन-प्रशासन से मिलीभगत कर एक ही व्यक्ति के रिश्तेदारों ने आदिवासियों के 63 भूखंड को खरीदा। शासन को शिकायत के बाद 108 आदिवासियों की जमीन की नामांतरण रद्द तो की गई। लेकिन प्रशासन द्वारा आदिवासी भूमि को आज भी कब्जामुक्त नहीं करा सके। दिलचस्प तो यह है कि कई जमीनों में ऑलीशान रिसोर्ट बनने के साथ ही एक दूसरे हाथों में बिकवा दी गई है।

साल 2010-11 में दस्तावेज में कूटरचना कर दलालों से मिलीभगत करते हुए 132 आदिवासियों की जमीन को फर्जी सील लगाकर बेचने की अनुमति दे दी। जांच के बाद 108 प्रकरणों में रजिस्ट्री रद्द की गई।

इस गिरोह के मास्टर माइंड को भी जानिए
इस फर्जीवाड़ा को अंजाम देने में पिथौरा के लक्ष्मीनारायण अग्रवाल (फुन्नु सेठ) जिन्होंने खुद के नाम पर 08 प्लाट, इसके अलावा पत्नी दामाद, बेटी और रिश्तेदार विजय मित्तल 11 प्लाट, मुकेश अग्रवाल, मोहन अग्रवाल, अनिता अग्रवाल, श्याम सुंदर अग्रवाल, कमला बाई, सरस्वती अग्रवाल, पुष्पा अग्रवाल, गोविंद अग्रवाल, आकाश अग्रवाल, प्रशांत अग्रवाल, अमृतलाल अग्रवाल, मनोज अग्रवाल कुल इनके नाम पर कुल 63 आदिवासियों की जमीन को खरीदा गया है। लक्ष्मीनारायण अग्रवाल के दामाद विजय मित्तल के नाम पर 25 से अधिक भूखंड विशाखापट्नम, समता कालोनी रायपुर तथा पिथौरा के तीन अलग-अलग पते में जमीन खरीदी गई है।

क्या अब आदिवासी के जमीन से रिसोर्ट हटेगा
ग्राम भावा के भागवत पिता सनमान गोड़ रकबा 546, 547 के 2.60 हेक्टेयर जमीन को खरीदी गई। इस भूमि पर रिसार्ट बना हुआ है। जबकि यह प्रकरण 108 में है, जिसका नामांतरण रद्द किया गया है। प्रशासन ने उक्त आदिवासी परिवार को कब्जा नहीं दिला सका।

इन्हें नहीं मिली अब तक न्याय

चिरको के सुरजा बाई/ चैतराम गोड़, मामाभांचा के चेतन पिता बल्दूसिंग, भोकलुडीह के टेगनु पिता मुकुंद, नवागांव के मनराखन पिता पल्टुराम, राजासेवैया के विष्णु पिता सुकलाल गोड़, लहरौद के भीखुसिंह पिता शंभूसिह, ढांक के लालसिंह पिता धरवा बंजारा, मयाराम पिता इंदल, झाकरमुड़ा के मयासिंग ईतवारी, लहरौद के संतराम पिता मंगलु पटेवा के गोविंद पिता धुरवा, नवागांव के अर्जुन पिता श्याम, कसहीबाहरा के रामसिंग पिता विरसिंग, लहरौद के ह्रदयलाल पिता हनुमान, अमलीडीह के दरसराम पिता भगवानी, सिंघुपाली के संकीर्तन पिता अलखराम, कोलपदर के गजानंद पिता तुलसीराम, बरेकेल खुर्द के उसतराम पिता सुखराम, कोलपदर के चिंताराम पिता पीलाराम, जंघोरा के अजोरसिंह पिता अमरूद, टेका के नारायण पिता भाजो के जमीन की खरीदी और बिक्री की गई।

 

रिपोर्ट नवीन कुमार सोनी ibn24x7news छत्तीसगढ़

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